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समझौता ब्लास्ट केस में एनआईए को बड़ा झटका

Sat, 05 Sep 2015 05:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
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बहुचर्चित समझौता ब्लास्ट मामले में शुक्रवार को नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान पांच गवाह पेश किए गए, जिनमें से चार अपने बयानों से मुकर गए, इससे एनआईए को झटका लगा है।
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मुकरने वाले गवाहों ने इस मामले में मुख्य आरोपी असीमानंद सहित अन्य आरोपियों को भी पहचानने से इंकार कर दिया। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है।

सुबह इस मामले में मुख्य आरोपी असीमानंद सहित लोकेश शर्मा, कमल चौहान व राजेंद्र चौधरी को अदालत में पेश किया गया। चारों गवाह कोर्ट में पहले दिए गए बयानों से पलट गए।
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झालावाड़, राजस्थान निवासी लाल कृष्ण जोशी ने अपने बयानों में कहा कि वह प्रज्ञा ठाकुर को एक आम व्यक्ति की तरह जानते हैं, लेकिन उनसे कभी भी कोई मतलब नहीं रहा है और न ही इस घटना से कोई ताल्लुक।
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18 फरवरी 2007 को समझौता एक्सप्रेस में हुआ था धमाका

जयपुर के गुजराती अतिथि गृह की प्रबंधक अरुणा ठाकुर ने अदालत में दिए अपने बयान में कहा कि घटना के बाद धर्मशाला में ठहरने के लिए सात व्यक्ति आए थे, जिनका ब्योरा पेश किया। लेकिन, उन्होंने भी असीमानंद को पहचानने से इंकार कर दिया।

हरिद्वार निवासी अजय चौहान और शक्ति सिंह ने भी अदालत में बयान दिया कि धमाके की साजिश में असीमानंद या उनके साथियों का हाथ होने से इंकार कर दिया। हालांकि पहले एनआईए को दिए गए बयान में उन्होंने पुलिस के दबाव में इस साजिश में असीमानंद के शामिल होने की बात कही थी।

आरएसएस से जुड़े रहे आगरा निवासी राजेश्वर ने कहा कि कहा मैं जिस असीमानंद को जानता हूं, वह गुजरात में रहते हैं, लेकिन अदालत में पेश किए गए असीमानंद के बारे में कहा कि यह कोई और हैं।

गौरतलब है कि समझौता ब्लास्ट मामले की सुनवाई के दौरान अब तक करीब एक दर्जन गवाह अपने बयानों से पलट चुके हैं। इस मामले में अब तक 144 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। 18 फरवरी 2007 समझौता एक्सप्रेस में हुए धमाके में पानीपत के दीवाना स्टेशन के पास भारत-पाकिस्तान के यात्रियों की मौत हुई थी।
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