नेपाली युवती के दोषियों को जो सजा सुनाई गई है, उस हिसाब से वह अब जिंदगी भर जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। यदि उच्च अदालतों में फांसी की सजा में रियायत भी मिल गई तो भी पूरी जिंदगी जेल में ही काटनी पड़ेगी। पीड़ित पक्ष के वकील प्रदीप मलिक ने सजा की विवेचना करते हुए यह बात कही।
यूं समझें ऐतिहासिक फैसले को
वकील प्रदीप मलिक के मुताबिक, यह कई मायनों में ऐतिहासिक फैसला है। सभी दोषियों को रेप के मामले में आजीवन कारावास और 302 में मौत की सजा सुनाई गई है। सभी को 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी किया गया।
इसके अलावा सभी को धारा 366 में दस वर्ष की सजा और धारा 201 में सात वर्ष की सजा भी सुनाई गई। यदि हायर कोर्ट में मौत की सजा में किसी आरोपी को रियायत भी मिलती है और ये सजाएं बरकरार रहती हैं, तो भी ये कभी जेल से बाहर नहीं निकल पाएंगे। अदालत ने सभी सजाएं एक के बाद भोगने के आदेश दिए हैं।
फैसला बनेगा नजीर, न पैरोल मिलेगी न कोई रियायत
आम तौर पर अलग-अलग धाराओं की सजाएं कंटीन्यूटी में यानी साथ-साथ ही चलती हैं। लेकिन इस मामले में अलग-अलग सजाएं भुगतनी होंगी।
सभी को दस वर्ष की सजा के अलावा सात वर्ष की सजा यानी कुल 17 वर्ष की कैद होगी। आजीवन कारावास अलग है ही। इस लिहाज से इनमें से कोई भी कभी जेल से बाहर नहीं आ पाएगा।
एडवोकेट प्रदीप ने बताया कि इन दोषियों को जो सजा मिली है वह अपने आप में नजीर है। जो फैसला दिया गया है, उसमें साफ कहा गया है कि इनमें से किसी भी दोषी को न तो कभी पैरोल मिलेगी, न ही किसी तरह की रियायत या सुविधा ही दी जाएगी।
इनके पास सिर्फ एक ही रास्ता बचा है, वह है अपील का। एक माह में अपील करना होगी। उच्च अदालत में कुछ संशोधन हो जाए तो बात अलग है, लेकिन इस फैसले ने ऐसे लोगों के लिए नजीर पेश की है।