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'निर्भया' के भाई-बहन बोले, अभी फैसला है, फांसी होगी तभी सुकून

Tue, 22 Dec 2015 11:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक।
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जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन से आज तक न हमें चैन मिला और न ही हमारी बहन की आत्मा को शांति मिली। फैसला आ गया। सुना है सभी को फांसी की सजा सुनाई गई है। फैसला सही है।
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इससे हमें राहत भी मिली, लेकिन पूरा सुकून उस दिन मिलेगा जब इन सभी दरिंदों को फांसी पर लटकाया जाएगा। किसी की बहन बेटी की इज्जत और जिंदगी से खेलने की सजा कैसी दर्दनाक हो सकती है, ऐसे दरिंदों को पता चलना चाहिए।

हमारी बहन की आत्मा को भी शांति उसी दिन मिलेगी, जब इन्हें सजा दे दी जाएगी। यह कहना है दरिंदों का शिकार बनी नेपाली मंदबुद्धि युवती की बहन का।

फैसले का दिन होने के बाद भी शहर की चिन्योट कॉलोनी में रहने वाले पीड़ित परिवार ने हौसला नहीं खोया। सिर्फ दरिंदों के किए की सही सजा की प्रार्थना ही करते रहे। भावुक होकर बहन ने यह भी कह दिया, प्लीज उसे निर्भया मत कहो...।
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सोमवार को अदालत में पूरा दिन फैसला सुनाने की प्रक्रिया चल रही थी। उधर मृतका की बहन और भाई प्रार्थना कर रहे थे। प्रार्थना पूरी की और अपने अपने कामों पर निकल गए। कई बार कोर्ट जाने का भी मन हुआ, लेकिन नहीं गए। सिर्फ इंतजार किया और मन लगाने के लिए काम करते रहे। जैसे ही फैसले की सूचना मीडिया से मिली चेहरे पर राहत और आंखों में इंसाफ मिलने की खुशी भी मचल गई। दो बूंद आंसू अपनी बहन के लिए बड़ी बहन की आंखों से छलक आए।

बहन ने बताया कि उनके पूरे परिवार को साढ़े 10 महीने से इस फैसले का इंतजार था। जज ने जो फैसला सुनाया है, हम उसका तहेदिल से सम्मान करते हैं। उन्हें भी यही उम्मीद थी। सभी गुनहगारों के लिए इससे बड़ी सजा और कोई नहीं हो सकती है। यह फैसला ऐसे लोगों के लिए एक सबक है, जो बहन-बेटियों को सिर्फ एक चीज समझते हैं।
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अभी भी दहशत में है परिवार

भाई ने बताया कि उनका पूरा परिवार अभी भी दहशत में है। उस दर्दनाक हादसे को हुए साढ़े 10 महीने हो गए हैं, फिर भी दिल सहमा हुआ है। बहू-बेटियों के लिए यह शहर बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। इसलिए अपनी तीनों भांजियों को स्कूल छोड़ने और लाने के लिए भी वे खुद ही जाते हैं। कभी भी उन्हें अकेला नहीं छोड़ते हैं।

फैसला सुनने के लिए ही रुका था
मृतका के भाई ने बताया कि वह घटना के कुछ ही दिन बाद नेपाल से रोहतक आ गया था। तभी से इस फैसले को सुनने के लिए ही रुके हुए हैं। बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा हूं, लेकिन साल बीतने को है। सिर्फ परीक्षा देने के लिए ही नेपाल गया था।

मां से नहीं हो पाया संपर्क
मृतका की बहन ने बताया कि मां से सोमवार सुबह बात हुई थी। वह शाम से संपर्क करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक बात नहीं हो पाई है। वह खुद अपनी मां को यह फैसला सुनाने के लिए बेकरार है।

8वां गुनहगार रिहा हुआ तो दोबारा करेंगे अपील
पीड़ित परिवार का कहना है कि अभी इस केस के 8वें गुनहगार को सजा होनी बाकी है। नेपाली मूल के नाबालिग आरोपी पर जुवेनाइल कोर्ट में केस चल रहा है। अगर वह भी दिल्ली के निर्भया कांड के नाबालिग आरोपी की तरह रिहा किया गया तो वे दोबारा से उसे सजा दिलाने के लिए अपील करेंगे।

ये है मामला
1 फरवरी 2015 को चिन्योट कॉलोनी निवासी एक मंदबुद्धि नेपाली मूल की युवती घर से अचानक लापता हो गई। पुलिस में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। लेकिन 4 दिन बाद युवती का शव बहुअकबरपुर गांव के खेतों में मिला। कुत्ते उसके शव को नोंच रहे थे। पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ कि युवती के साथ दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी गईं।
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