जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन से आज तक न हमें चैन मिला और न ही हमारी बहन की आत्मा को शांति मिली। फैसला आ गया। सुना है सभी को फांसी की सजा सुनाई गई है। फैसला सही है।
इससे हमें राहत भी मिली, लेकिन पूरा सुकून उस दिन मिलेगा जब इन सभी दरिंदों को फांसी पर लटकाया जाएगा। किसी की बहन बेटी की इज्जत और जिंदगी से खेलने की सजा कैसी दर्दनाक हो सकती है, ऐसे दरिंदों को पता चलना चाहिए।
हमारी बहन की आत्मा को भी शांति उसी दिन मिलेगी, जब इन्हें सजा दे दी जाएगी। यह कहना है दरिंदों का शिकार बनी नेपाली मंदबुद्धि युवती की बहन का।
फैसले का दिन होने के बाद भी शहर की चिन्योट कॉलोनी में रहने वाले पीड़ित परिवार ने हौसला नहीं खोया। सिर्फ दरिंदों के किए की सही सजा की प्रार्थना ही करते रहे। भावुक होकर बहन ने यह भी कह दिया, प्लीज उसे निर्भया मत कहो...।
सोमवार को अदालत में पूरा दिन फैसला सुनाने की प्रक्रिया चल रही थी। उधर मृतका की बहन और भाई प्रार्थना कर रहे थे। प्रार्थना पूरी की और अपने अपने कामों पर निकल गए। कई बार कोर्ट जाने का भी मन हुआ, लेकिन नहीं गए। सिर्फ इंतजार किया और मन लगाने के लिए काम करते रहे। जैसे ही फैसले की सूचना मीडिया से मिली चेहरे पर राहत और आंखों में इंसाफ मिलने की खुशी भी मचल गई। दो बूंद आंसू अपनी बहन के लिए बड़ी बहन की आंखों से छलक आए।
बहन ने बताया कि उनके पूरे परिवार को साढ़े 10 महीने से इस फैसले का इंतजार था। जज ने जो फैसला सुनाया है, हम उसका तहेदिल से सम्मान करते हैं। उन्हें भी यही उम्मीद थी। सभी गुनहगारों के लिए इससे बड़ी सजा और कोई नहीं हो सकती है। यह फैसला ऐसे लोगों के लिए एक सबक है, जो बहन-बेटियों को सिर्फ एक चीज समझते हैं।