रोडवेज बस में बहादुरी के कारण रातों-रात सुर्खियों में आईं बहनों की बहादुरी पर 'मनचलों' की मां ने सवाल उठाए और दोनों को जालसाज करार दिया। काफी तादाद में रोहतक के लघु सचिवालय पहुंची महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनके बच्चों को फंसाया गया है। न्याय नहीं मिला तो वे चुप नहीं रहेंगी। आसन की पंचायत और युवकों के परिजनों में मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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परिजनों ने सभी आरोपों को निराधार बताया। बस में मौजूद सवारियों से भी मामले में पूछताछ की मांग की गई। परिजनों ने चेतावनी दी है कि अगर न्याय नहीं मिला तो वे रोड जाम कर देंगे और महापंचायत बुलाएंगे।
पुलिस कार्रवाई पर सवाल
गांव के सरपंच राज सिंह, एपेक्स प्रधान संदीप हुड्डा, पूर्व सरपंच रामचंद्र, पूर्व सरपंच सरूप सिंह व तीनों आरोपी के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाया। कहा, पुलिस रविवार रात को गांव में पहुंची और तीनों को गिरफ्तार कर लिया। जबकि पहले भी पुलिस तीनों आरोपियों से मुलाकात कर चुकी थी और सोमवार तक का समय दिया गया था।
पंचायत और परिजनों ने यह बताई कहानी घटना वाले दिन सीट को लेकर छात्र और छात्राओं के बीच झगड़ा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलदीप व मोहित किसी एक बुजुर्ग महिला का टिकट लेकर आए थे और उसे सीट नंबर मिला था। लेकिन वहां पर लड़कियां पहले ही बैठी हुईं थी। लड़कियों ने सीट से उठने से मना कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी कहासुनी हो गई।
आरोप लगाया कि लड़कियों ने ही मारपीट शुरू की थी। उनके बच्चों पर गलत आरोप लगाए गए हैं। वीडियो फुटेज में भी साफ दिखाई दे रहा है कि लड़कियां हमारे लड़कों को ही मार रही हैं, जबकि वह बचाव करते हुए नजर आ रहा है।
छह-सात माह पहले किया था पैसे लेकर फैसला
परिजनों व ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि छह-सात माह पहले इन्हीं लड़कियों ने सिसाना गांव के लड़कों पर आरोप लगाया था। बाद में रुपये लेकर फैसला कर लिया। यदि सही तरीके से जांच की जाए तो सच सामने आएगा। ग्रामीणों ने दावा किया कि तीनों लड़कों के चरित्र के बारे में गांव से तहकीकात की जाए और साथ ही कालेज में भी पता करें।
किसने क्या कहा ‘मेरे बेटे का कोई कुसूर नहीं है। मेरा बेटा कमजोर नहीं था, जो लड़कियों से मार खा जाता, लेकिन उसके संस्कार अच्छे थे। इसलिए उसने लड़कियों पर हाथ नहीं उठाया। आरोप लगाया कि लड़कियों के पिता ने उनसे स्कूटी या फिर 50 हजार रुपये की मांग की थी। लेकिन हमनें नहीं दिए क्योंकि हमारा लड़का गलत नहीं था।’ पूर्व फौजी बलबीर सिंह व सुशीला आरोपी कुलदीप के पिता व मां।
‘कुलदीप चरित्र का अच्छा है। घर ही नहीं पूरे गांव में शराफत से पेश आता है। कभी किसी महिला से भी गलत नहीं बोला है।’ संजना, कुलदीप की भाभी।
‘हमारे तीनों बच्चे निर्दोष हैं। वे कभी भी गलत कदम नहीं उठा सकते। वे ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिनसे उनका सिर झुके। उन पर लगाए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। लड़कियां जानबूझ कर उन्हें फंसा रही हैं।’ दयावती, तीनों आरोपियों की रिश्ते में ताई।
‘मेरा भाई इतना गलत काम नहीं कर सकता। क्योंकि उसे पता है कि उसकी पांच बहनें हैं। वह लड़कियों का सम्मान करना जानता है।’ अनीता, आरोपी कुलदीप की बहन।
‘मेरा बेटा शरीफ है। वह तो घी लेकर भालौठ से चढ़ा था। उसका मारपीट से कोई सरोकार नहीं है। उसे झूठा फंसाया जा रहा है। मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।’ इंद्रावती, आरोपी दीपक की मां।
‘मेरा बेटा शरीफ है। कालेज व गांव कहीं से भी पता कर लिया जाए। कभी शिकायत नहीं आई, लेकिन अब उसे फंसा दिया है। यदि तीनों लड़के अच्छे नहीं होते तो सारे गांव की पंचायत उनके समर्थन में नहीं आती।’ आरोपी मोहित के पिता।