फर्जी कागजात के आधार पर लग्जरी कारों की रजिस्ट्रेशन कराने के मामले में एक दिन पहले कमलजीत वर्मा के सरेंडर के बाद विजिलेंस ने बुधवार को दूसरी गिरफ्तारी की। दूसरे आरोपी की पहचान सेक्टर-40 निवासी अंकुर के तौर पर हुई है। विजिलेंस ने उसे अदालत में पेश कर दो दिन का रिमांड हासिल किया है। इससे पहले सरकारी वकील मनजिंदर सिंह ने अंकुर के रिमांड के लिए अदालत को बताया कि अंकुर और कमलजीत वर्मा पिछले एक साल से आपस में संपर्क में थे। अंकुर की गिरफ्तारी कमलजीत की निशानदेही पर ही की गई है। उसने विजिलेंस को दी डिस्क्लोजर स्टेटमेंट में बताया था कि वह सेक्टर-17 में फोटोस्टेट की दुकान चलाने वाले अंकुर के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था।
कमलजीत उसे दस्तावेज मुहैया कराता था और अंकुर उन्हें कंप्यूटर में एडिट करता था। कमलजीत के बयान के बाद विजिलेंस ने अंकुर की गिरफ्तारी की। विजिलेंस ने उससे कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, डाटा रिकवरी सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। विजिलेंस ने कमलजीत और अंकुर की पिछले एक साल की कॉल डिटेल भी कोर्ट को सौंपी है। सरकारी वकील के अनुसार विजिलेंस को अंकुर से अभी नकली स्टैंप और अन्य लोगों की मिलीभगत के लिए पूछताछ करनी है। इस आधार पर उन्होंने अंकुर का रिमांड मांगा था। इसके बाद अदालत ने अंकुर को दो दिन के रिमांड पर भेज दिया।
आरएलए से रिकॉर्ड चेक करने को कहा
विजिलेंस ने आरएलए विभाग से एक साल का रिकॉर्ड जांचने को कहा है। साथ ही पूछा है कि इस तरह और कितनी गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन में धांधली हो सकती है। इसकी जांच कर उन्होंने ऐसी गाड़ियों की सूची सौंपने को कहा है।
संदेह में आरएलए कर्मियों की भूमिका
विजिलेंस ने मामले में दो गिरफ्तारियां होने के बाद उनसे पूछताछ के आधार पर कार मालिकों जिनके नाम पर गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन कराई है, उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं इसकी भी जांच की जा रही है कि इस गोरखधंधे में पकडे़ गए आरोपियों ने उनके इशारे पर इसे अंजाम दिया या फिर आरोपियों ने उनके साथ धोखाधड़ी की है। वहीं पुलिस इस पूरे मामले में आरएलए अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार इसे लेकर बुधवार को कुछ अधिकारियों से पूछताछ भी की गई। पुलिस लग्जरी कार कंपनियों से भी कारों के दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है, जिनके रजिस्ट्रेशन में धांधली की गई है।