आरोपी कांस्टेबल लड़की के चिल्लाने पर उसके मुंह पर कपड़ा बांधकर पीटते थे और फिर दुराचार करते थे।
दुराचारी पुलिस गैंग मामले की जांच में यह बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार दोनों मुख्य आरोपी बर्खास्त कांस्टेबल अक्षय और सुनील ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि नाबालिग छात्रा जब स्कूल या ड्यूटी से घर लौट रही होती थी तो वे उसे रास्ते से गाड़ी में उठाकर मुल्लांपुर के जंगल में ले जाते थे।
दुराचार के बाद लड़की को वे जो गर्भनिरोधक दवा खिलाते थे उसे खुड्डा लाहौरा की कैमिस्ट शॉप से खरीदा जाता था।
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रिवाल्वर बरामद नहीं
पीड़िता ने एफआईआर में कहा है कि वह जब विरोध करती थी तो उसे धमकाने के लिए उसके सिर पर रिवाल्वर लगा दी जाती थी। पुलिस की जांच टीम अभी तक वह रिवाल्वर या पिस्टल बरामद नहीं कर सकी है, जिससे पीड़िता को धमकाया जाता था।
पीड़िता ने मीडिया को लिखा पत्र
जिस दिन मैंने कोर्ट में अपने बयान दर्ज करवाए हैं, उस दिन से आज तक में कांउसलर भैया सौरभ जोशी से नहीं मिली हूं।
मैं यह भी बताना चाहती हूं कि 20 दिसंबर की रात तक अपने घर पर रुकी थी पर बार-बार लोग घर पर आकर सहानुभूति जता रहे थे और मुझे एक ही सवाल का जवाब बार-बार देना पड़ता था।
इसलिए 21 दिसंबर की सुबह मैं वहां से अपने एक पारिवारिक मित्र के घर चली गई। मैं एसआईटी से भाग नहीं रही हूं, पर यह सोचती हूं कि चंडीगढ़ पुलिस द्वारा बनाई गई एसआईटी पर क्यों विश्वास करूं।
यह एसआईटी भी उन्हीं पुलिस कर्मियों की है, जिनके सहयोगियों ने मेरे साथ रेप किया था। ---मुझे लगता है कि चंडीगढ़ पुलिस केस की इंक्वायरी ऐसे करेगी कि दोषी आखिर में बरी हो जाएं।
मुझे लगता है कि इंक्वायरी ऐसी एजेंसी से करवाई जाए जो कम से कम चंडीगढ़ पुलिस के नीचे न आती हो।