हरप्रीत 2017 में 19 राष्ट्रीय राइफल्स में भर्ती हुआ था। एक ही गांव के होने की वजह से उनमें दोस्ती थी। जिसके बाद उसने सिपाही हरप्रीत को लालच देकर इस काम के लिए राजी कर लिया। जिसके बाद हरप्रीत ने सिपाही गुरभेज सिंह को भी पाकिस्तानी जासूसी के खेल में शामिल कर लिया।
गुरभेज सिंह तरनतारन के पुन्नियां गांव का रहने वाला है। 18 सिख लाइट इन्फेंट्री में तैनात गुरभेज कारगिल में क्लर्क के पद पर है। उसने सेना 2015 में ज्वाइन की थी। वहीं से उसे आसानी से राष्ट्रीय सुरक्षा व रक्षा से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हो जाते थे।
कड़ी से कड़ी जुड़ती चली गई
रणवीर से पूछताछ के बाद पुलिस ने एक और तस्कर गोपी को गिरफ्तार किया। गोपी ने सनसनीखेज खुलासा किया कि भारतीय सुरक्षा के गोपनीय दस्तावेज उसने सीमा पार पाकिस्तान में बैठे तस्करों को उपलब्ध कराया जिसके बदले वह हेरोइन भेजते हैं। जिनमें से एक की पहचान कोठार के रूप में हुई जबकि दूसरा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का एजेंट सिकंदर निकला।
दोनों पाक एजेंट रणवीर सिंह व गोपी को पैसे व हेरोइन भेजते थे और बदले में सुरक्षा के दस्तावेज लेते थे। यह सारे दस्तावेज इनक्रिप्टेड एप के जरिए भेजे गए। रणवीर ने गोपनीय दस्तावेज के बदले भारतीय सेना के जवान हरप्रीत को रुपये दिए जबकि उसने आगे गुरभेज के अकाउंट में ट्रांसफर किए।
कितनी राशि भारतीय सेना के जवान ले चुके थे, यह जानकारी की जा रही है। एसएसपी नवीन सिंगला ने बताया कि दोनों सैनिकों को सेना ने पुलिस के हवाले कर दिया है। अब उनसे पूछताछ की जा रही है कि उनके साथ कोई और तो नहीं मिला हुआ है। उनके खिलाफ केस दर्ज कर पुलिस की जांच जारी है।