इस दौरान एसजीपीसी परिसर में स्थित सरायों में दर्शन को पहुंची संगत यह देखकर सहम गई। वहीं, सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने के लिए जा रहे श्रद्धालु वहां से डरकर भाग गए।
मीडिया कर्मचारियों को थप्पड़ मारे, मोबाइल-कैमरे छीने
एसजीपीसी के कर्मचारियों ने कवरेज कर रहे कई मीडिया कर्मचारियों को थप्पड़ मारे और उनके मोबाइल व कैमरे छीन लिए। उन्हें रिपोर्टिंग करने से रोक दिया गया। हमले से गुस्साए मीडियाकर्मी भी एसजीपीसी दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने एसजीपीसी मुर्दाबाद के नारे लगाए।
20 दिन पहले भी जड़ा था ताला
सुखजीत सिंह खोसा ने 20 दिन पहले भी एसजीपीसी दफ्तर के मुख्य गेट पर ताला जड़ा था। खोसा की इस कार्रवाई का कई पंथक संगठनों ने समर्थन नहीं किया था। इससे नाराज होकर वे घर चले गए थे। बाद में उन्हें संगठनों ने मनाया। शनिवार को भी पंथक संगठन खोसा की इस कार्रवाई का समर्थन करते नहीं दिखे।
एसजीपीसी कर्मचारियों पर हमला पंजाब सरकार की साजिश : लौंगोवाल
एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि एसजीपीसी कर्मचारियों पर हमला पंजाब सरकार की साजिश है। जिन लोगों ने एसजीपीसी कर्मचारियों पर हमला किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। एसजीपीसी परिसर में धरने पर बैठे संगठनों के विरुद्ध कई बार शिकायत की गई कि इनके पास हथियार हैं, परंतु पंजाब सरकार ने कोई भी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कई बार इन संगठनों से बात की, इसके बावजूद वे धरने पर बैठ रहे।
शांतिपूर्ण तरीके से दे रहे थे धरना : प्रोफेसर बलजिंदर
जत्थेदार हवारा कमेटी के प्रवक्ता प्रोफेसर बलजिंदर सिंह ने कहा कि एसजीपीसी टास्क फोर्स ने संगठनों के सदस्यों पर उस समय हमला किया जब वे शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे। इसके बावजूद संगठन के सदस्यों ने धैर्य दिखाया। उन्होंने कहा कि हमला करने वालों में वे भी शामिल थे जिन्हें लापता स्वरूपों के मामले में एसजीपीसी ने बर्खास्त किया हुआ है।