राजद्रोह के आरोपी प्रोफेसर विरेंद्र सिंह को जिला एवं सत्र न्यायालय ने बुधवार को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी। कोर्ट ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पूर्व राजनीतिक सलाहकार प्रो विरेंद्र सिंह से 50 हजार रुपये का जमानतनामा भरवाया। इसके बाद ही शाम छह बजे उन्हें सुनारिया जेल से रिहा कर दिया गया। उनके वकील ने दो दिन पहले कोर्ट में उनकी बीमारी का हवाला देते हुए जमानत याचिका दायर की थी।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अदालत ने बुधवार को प्रो विरेंद्र सिंह की जमानत याचिका पर पुलिस को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। पुलिस ने जमानत याचिका खारिज करने की मांग करते हुए कोर्ट में कहा कि आरोप संगीन है। अभी विरेंद्र सिंह से मोबाइल पर बात करने वाले अन्य लोगों से पूछताछ करनी है, इसलिए जमानत मंजूर न की जाए। पुलिस ने कहा कि प्रो विरेंद्र सिंह को उपद्रव के दौरान 24 मोबाइल कॉल सांपला और 17 कॉल एमडीयू गेट से की गई हैं।
कॉल करने वाले सभी लोगों से भी पूछताछ नहीं हो सकी है। इनका मिलान करना शेष है। सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी विरेंद्र सिंह प्रभावशाली आदमी हैं। जमानत के बाद जांच को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए उन्हें जमानत दे दी कि केवल केवल ऑडियो टेप की बातचीत से यह साबित नहीं होता कि प्रदेश में आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ विरेंद्र सिंह ने करवाई है
कोर्ट ने कहा
केवल ऑडियो टेप की बातचीत से यह साबित नहीं होता कि प्रदेश में आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ विरेंद्र सिंह ने करवाई है। अभी तक पुलिस विरेंद्र से फोन पर बात करने वाले 82 लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इसमें भी राजद्रोह से जुड़ा कोई बिंदु नहीं नजर आया। इतना ही नहीं 10 दिनों की पुलिस हिरासत में पूछताछ करने के बावजूद विरेंद्र सिंह के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आ सके।
विरेंद्र सिंह बोले, पुलिस मेरे बहाने कांग्रेस के बड़े नेताओं को निशाना बनाना चाहती है
मुझे राजनीतिक प्रतिशोध के कारण झूठे केस में फंसाया गया है। पुलिस जांच में भी मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। अभिव्यक्ति की आजादी की तो बात दूर मेरी तो मोबाइल पर बात करने की भी आजादी प्रदेश सरकार ने छीन ली। पुलिस ने मेरे बहाने कांग्रेस के बड़े नेता को निशाना बनाने की कोशिश की है।