जमालपुर की आहलुवालिया कालोनी में शनिवार को दो भाईयों की तथाकथित मुठभेड़ में मौत का राज पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोल दिया। दोनों को इतने करीब से गोलियां मारी गईं कि अधिकतर गोलियां शरीर के आरपार निकल गईं।
सिविल अस्पताल में रविवार को डॉ. सुरेश कौशल, डॉ. जसबीर कौर और डॉ. सीमा चोपड़ा पर आधारित एक बोर्ड ने जतिंदर और हरिंदर के शवों का पोस्टमार्टम किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हो गया है कि हरिंदर को तीन गोलियां लगी थीं। दायीं ओर से चलाई एक गोली हरिंदर के शरीर के आरपार हो गई जबकि सीने पर चलाई गई गोली शरीर में ही धंसी रह गई। हरिंदर पर चलाई गई गोलियों में से एक उसकी बाजू में धंसी मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, हरिंदर के भाई जतिंदर को बहुत करीब से दो गोलियां मारी गईं। इनमें से एक गोली सिर पर मारी गई, जो जतिंदर की गर्दन से पार निकल गई।
पुलिस की कहानी झूठी साबित
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के कथित एनकाउंटर की कहानी को पूरी तरह झुठला दिया है। अपना बचाव करते हुए पुलिस ने शनिवार को क्राइम ब्रीफिंग के दौरान इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की बात कही थी।
लेकिन शनिवार देर रात तक माछीवाड़ा एसएचओ के रीडर कांस्टेबल यादविंदर सिंह, पंजाब होमगार्ड के जवान बलदेव और अजीत सिंह के साथ-साथ सरपंच राजविंदर कौर के पति गुरजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। एसीपी साहनेवाल लखवीर सिंह टिवाणा ने कहा कि पुलिस ने रविवार को सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को एक अक्तूबर तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
रविवार को मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों ने माछीवाड़ा-समराला चौक पर शव रखकर करीब एक घंटे प्रदर्शन किया और मामले की सीबीआई जांच की मांग की। पुलिस के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारी सड़क से हटे।
'साजिश के तहत दोनों को मार डाला'
मृतक जतिंदर और हरिंदर के पिता सतपाल सिंह ने बताया कि उनका बड़ा बेटा जतिंदर बीए कर चुका था और पीसीएस की तैयारी कर रहा था। हरिंदर भी प्राइवेट नौकरी करके पढ़ाई कर रहा था। सतपाल ने कहा कि उनका परिवार बहुत गरीब है। वह मेहनत मजदूरी कर परिवार का गुजारा चलाते हैं।
परिवार की हालत देखते हुए ही उनके दोनों बेटों ने कभी अपनी पढ़ाई के लिए घर से पैसे नहीं मांगे थे। दोनों नौकरी करके जो पैसे कमाते, उसी से अपनी पढ़ाई पर खर्च पूरा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके बेटों को नशे की कोई लत नहीं थी। सतपाल सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके बेटों को झूठे मामले में फंसाया और साजिश के तहत दोनों को मार डाला।
वहीं हरिंदर और जतिंदर की हत्या के समय पुलिस ने राजवीर और बनी नामक जिन दो युवकों की गिरफ्तारी दिखाई थी। उनका कोई सुराग अब पुलिस नहीं दे रही। राजवीर के मामा के बेटे इंद्रपाल सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सभी युवकों के खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया है।
मुख्यमंत्री बादल ने डीसी से मांगी रिपोर्ट
पुलिस वाले हत्याएं करने के बाद राजवीर और बनी को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गए थे। अभी तक पुलिस ने राजवीर के परिजनों को यह नहीं बताया कि वह किस थाने में है और उसकी हालत क्या है। उन्होंने आशंका जताई कि माछीवाड़ा पुलिस राजवीर का भी फर्जी एनकाउंटर कर सकती है।
उधर, धार्मिक समागम में हिस्सा लेने लुधियाना के किचलू नगर पहुंचे मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने शनिवार को उक्त वारदात की पूरी रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने डीसी रजत अग्रवाल को मामले की रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री बादल ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि पुलिस पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं है। इस वारदात में जो भी कसूरवार होगा, उसके खिलाफ कानून अपना काम करेगा।