जमालपुर की आहलुवालिया कालोनी में दो सगे भाइयों की हत्या मामले में पुलिस ने जो कहानी बनाई, शाम होते होते पुलिस खुद ही उसमें फंस गई। पुलिस ऐसी कहानी बनाना चाहती थी कि किसी तरह पुलिस की साख बच सके।
पहले पुलिस बताती रही कि आरोपियों ने पुलिस पर गोली चलाई तो उसके बाद जवाबी फायरिंग में दोनों युवकों की मौत हो गई। शनिवार दोपहर तक अकाली सरपंच राजविंदर के पति गुरजीत सिंह का नाम तक नहीं था।
देर शाम को पुलिस ने कहानी तैयार की और तीन पुलिस मुलाजिमों के साथ साथ अकाली सरपंच के पति पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया।
आरोपियों से नहीं मिले कोई हथियार
एसीपी लखवीर सिंह टिवाना के अनुसार पुलिस ने घटनास्थल से तीन 32 बोर के पांच खोल, तीन खोल हेड बरामद की हैं। दो गोलियां मृतक युवकों के शवों से बरामद की गई हैं।
पुलिस मुलाजिमों के साथ अंदर गए सरपंच के पति गुरजीत सिंह के पास अपनी लाइसेंसी पिस्तौल थी और पुलिस मुलाजिमों के पास सरकारी हथियार था। आरोपियों के पास से अभी कोई भी हथियार बरामद नहीं हुआ है।
पुलिस मुलाजिमों ने सरकारी हथियार से गोली चलाई गई है या नहीं इसकी जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी है कि उन्होंने किस हथियार से गोली चलाई। पुलिस वारदात में इस्तेमाल हथियारों का भी पता लगा रही है।
वहीं आशंका है कि अगर पुलिस मुलाजिमों ने सरकारी हथियार में से गोली नहीं चलाई तो हो सकता है कि मुलाजिमों के पास अपना पर्सनल हथियार भी हो।
गिरफ्तारी पर भी रोक थी
सिविल अस्पताल में जतिंदर और हरिंदर के परिजनों के साथ पोस्टमार्टम कराने पहुंचे गिरफ्तार आरोपी राजवीर के भाई इंद्रपाल ने कहा कि पुलिस ने झूठे मामले में उनके भाई और अन्य युवकों को फंसाया और फर्जी मुठभेड़ दिखा कर दो बेकसूरों की हत्या कर दी। 21 अगस्त को सभी युवकों पर थाना माछीवाड़ा में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ था।
उसके बाद 28 अगस्त को अधिकारियों के सामने पेश होकर जांच की मांग की गई थी। इंद्रपाल ने आरोप लगाया था कि डीएसपी समराला अमृत सिंह इस पूरे मामले की जांच कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई हुई थी। उसके बावजूद पुलिस पांचों युवकों को पेशेवर अपराधी समझ कर गिरफ्तार करने में जुटी हुई थी।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने यह सब अकाली सरपंच के पति गुरजीत सिंह के साथ मिल कर किया और इस मामले में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराने वाले युवक के परिजन भी शामिल हैं।
शिनाख्त के लिए सरपंच की क्या जरूरत थी
इंद्रपाल ने पुलिस जांच पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि अगर पुलिस को युवकों के बारे में पता चल ही गया था कि सब आहलुवालिया कालोनी में रह रहे है तो सरपंच पति गुरजीत सिंह को साथ ले जाने की क्या जरूरत थी।
अगर सरपंच के पास हथियार था तो पुलिस उसे अपने साथ अंदर क्यों लेकर गई। पुलिस उसे बाहर भी खड़ा कर सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरपंच ने अंदर जाकर जानबूझ कर युवकों के साथ मारपीट की और पुलिस के साथ मिल उनकी हत्या कर दी।
पुलिस वालों के पास एके-47 थी
एसएसपी खन्ना हर्ष कुमार बांसल ने कहा कि आरोपी पुलिस मुलाजिमों के पास एक एके-47 थी, लेकिन उससे गोली चली या नहीं इसके बारे में जमालपुर पुलिस जांच कर रही है। अब जांच लुधियाना पुलिस के पास है।
वहीं राजवीर के परिजनों ने पुलिस अधिकारियों से जांच की मांग की थी और इस मामले में आरोपी युवकों की गिरफ्तारी पर किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई गई थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली पोल
जमालपुर की आहलुवालिया कालोनी में शनिवार को दो भाईयों की तथाकथित मुठभेड़ में मौत का राज पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोल दिया। दोनों को इतने करीब से गोलियां मारी गईं कि अधिकतर गोलियां शरीर के आरपार निकल गईं।
सिविल अस्पताल में रविवार को डॉ. सुरेश कौशल, डॉ. जसबीर कौर और डॉ. सीमा चोपड़ा पर आधारित एक बोर्ड ने जतिंदर और हरिंदर के शवों का पोस्टमार्टम किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हो गया है कि हरिंदर को तीन गोलियां लगी थीं। दायीं ओर से चलाई एक गोली हरिंदर के शरीर के आरपार हो गई जबकि सीने पर चलाई गई गोली शरीर में ही धंसी रह गई। हरिंदर पर चलाई गई गोलियों में से एक उसकी बाजू में धंसी मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, हरिंदर के भाई जतिंदर को बहुत करीब से दो गोलियां मारी गईं। इनमें से एक गोली सिर पर मारी गई, जो जतिंदर की गर्दन से पार निकल गई।
पुलिस की कहानी झूठी साबित
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के कथित एनकाउंटर की कहानी को पूरी तरह झुठला दिया है। अपना बचाव करते हुए पुलिस ने शनिवार को क्राइम ब्रीफिंग के दौरान इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की बात कही थी।
लेकिन शनिवार देर रात तक माछीवाड़ा एसएचओ के रीडर कांस्टेबल यादविंदर सिंह, पंजाब होमगार्ड के जवान बलदेव और अजीत सिंह के साथ-साथ सरपंच राजविंदर कौर के पति गुरजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। एसीपी साहनेवाल लखवीर सिंह टिवाणा ने कहा कि पुलिस ने रविवार को सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को एक अक्तूबर तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
रविवार को मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों ने माछीवाड़ा-समराला चौक पर शव रखकर करीब एक घंटे प्रदर्शन किया और मामले की सीबीआई जांच की मांग की। पुलिस के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारी सड़क से हटे।
'साजिश के तहत दोनों को मार डाला'
मृतक जतिंदर और हरिंदर के पिता सतपाल सिंह ने बताया कि उनका बड़ा बेटा जतिंदर बीए कर चुका था और पीसीएस की तैयारी कर रहा था। हरिंदर भी प्राइवेट नौकरी करके पढ़ाई कर रहा था। सतपाल ने कहा कि उनका परिवार बहुत गरीब है। वह मेहनत मजदूरी कर परिवार का गुजारा चलाते हैं।
परिवार की हालत देखते हुए ही उनके दोनों बेटों ने कभी अपनी पढ़ाई के लिए घर से पैसे नहीं मांगे थे। दोनों नौकरी करके जो पैसे कमाते, उसी से अपनी पढ़ाई पर खर्च पूरा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके बेटों को नशे की कोई लत नहीं थी। सतपाल सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके बेटों को झूठे मामले में फंसाया और साजिश के तहत दोनों को मार डाला।
वहीं हरिंदर और जतिंदर की हत्या के समय पुलिस ने राजवीर और बनी नामक जिन दो युवकों की गिरफ्तारी दिखाई थी। उनका कोई सुराग अब पुलिस नहीं दे रही। राजवीर के मामा के बेटे इंद्रपाल सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सभी युवकों के खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया है।
मुख्यमंत्री बादल ने डीसी से मांगी रिपोर्ट
पुलिस वाले हत्याएं करने के बाद राजवीर और बनी को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गए थे। अभी तक पुलिस ने राजवीर के परिजनों को यह नहीं बताया कि वह किस थाने में है और उसकी हालत क्या है। उन्होंने आशंका जताई कि माछीवाड़ा पुलिस राजवीर का भी फर्जी एनकाउंटर कर सकती है।
उधर, धार्मिक समागम में हिस्सा लेने लुधियाना के किचलू नगर पहुंचे मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने शनिवार को उक्त वारदात की पूरी रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने डीसी रजत अग्रवाल को मामले की रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री बादल ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि पुलिस पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं है। इस वारदात में जो भी कसूरवार होगा, उसके खिलाफ कानून अपना काम करेगा।