गिरोह के सरगना संजय उर्फ लाला और उसका चचेरा भाई संजय है। दोनों ने गांव में ही पहले यह काम शुरू किया। सूत्रों के अनुसार, संजय को कभी खाने के लाले थे, लेकिन अब दोनों ने गांव में आलीशान मकान बनाया हुआ है।
दोनों चचेरे भाई गांव में महंगी गाड़ी में घूमते थे और दूसरे युवाओं को अपने धंधे में शामिल करने के लिए कमीशन का लालच देते थे। युवाओं को दो से तीन हजार रुपये दिए जाते थे। गिरोह में शामिल शेरपुरा का ही दर्शन सिंह सिरसा के एक कॉलेज का विद्यार्थी है। आरोपी अजय भी अच्छे घर से है, उसके पिता खेती के साथ-साथ सीमेंट, रेत बजरी की दुकान चलाते हैं। आरोपी विकास के पिता खेती के साथ-साथ लकड़ी मिस्त्री का काम करते हैं। सभी आरोपी 18 से 24 साल की उम्र तक के हैं।
पुलिस ने गुरुवार को सात आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जांच में सामने आया है कि सातों आरोपियों ने विभिन्न कंपनियों के सिम जाली दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किए थे। आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि गिरोह के सरगना संदेश भेजकर युवाओं को अमीर बनाने का लालच देते हैं।
अब सीआईए साइबर ठगी के इस गैंग के अन्य आरोपियों की तलाश में पंजाब के रोपड़, मानसा, चंडीगढ़, जयपुर में दबिश देगी। वहीं, सीआईए पकड़े गए आरोपियों के बैंक अकाउंट की डिटेल भी खंगालेगी। साथ ही सभी सिम कंपनियों से सिम की आईडी नंबर, सिम नंबर और किसके नाम पर सिम जारी हुआ, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी।