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पोंजी घोटाला: 6 नए आरोपियों के नाम आए सामने, पिछले महीने ईडी ने दायर की थी चार्जशीट

Wed, 08 Aug 2018 09:47 AM IST
अमरीश शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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600 करोड़ के पोंजी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छह और आरोपियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग अधिनियम 2002 की धारा 3 और 4 के तहत सप्लीमेंटरी चार्जशीट दायर की है। नए आरोपियों में पश्चिम विहार, नई दिल्ली निवासी अरविंद कुमार सिंह, पत्नी रीता सिंह, भाई योगेंद्र प्रताप सिंह निवासी फरीदाबाद, पिता पारसनाथ सिंह, भाई राकेश सिंह और भतीजा पंकज सिंह शामिल हैं। खास बात यह है कि ये सभी छह आरोपी एक ही परिवार के सदस्य हैं।
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इससे पहले केस में कंपनी के छह डायरेक्टर ही आरोपी थे, लेकिन अब केस में कुल 12 आरोपी हो गए हैं। पिछली सुनवाई पर सेशन कोर्ट ने सभी नए छह आरोपियों को समन जारी कर अदालत में पेश होने के आदेश दिए थे, लेकिन कोई भी आरोपी अदालत में पेश नहीं हुआ। इस पर मंगलवार को सेशन कोर्ट ने अरविंद सिंह, योगेंद्र प्रताप, रीता सिंह और पारसनाथ सिंह के जमानती वारंट जारी कर दिए। वहीं, राकेश सिंह और पंकज सिंह को फिर से समन जारी किए हैं।

पिछले साल 27 सितंबर को ईडी ने कंपनी के सभी डायरेक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। दो हजार पेज की चार्जशीट में ईडी ने कंपनी के डायरेक्टरों के खिलाफ मनी लांड्रिंग अधिनियम 3 और 4 के तहत उन्हें आरोपी बनाया था। आरोपी डायरेक्टरों में मुगुनधन गंगम, सेलाथुराई भास्कर, चेलाधुरी, अमाल राज, राम कृष्णामूर्ति और कमल कुमार बख्शी के नाम शामिल थे।
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इनमें से केवल कमल बख्शी ही गिरफ्तार है, जबकि सेलाथुराई भास्कर, चेलाधुरी, अमाल राज और राम कृष्णामूर्ति को अदालत भगोड़ा घोषित कर चुकी है। वहीं, मलयेशिया में रह रहे एक डायरेक्टर मुगुनधन गंगम को फिलहाल गृह मंत्रालय के जरिए समन भेजे गए हैं।

 

सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
निवेशकों से बतौर एजेंट पैसे जमा करते थे अरविंद व अन्य
सप्लीमेंटरी चार्जशीट के अनुसार, ईडी की जांच में सामने आया कि दिल्ली निवासी अरविंद कुमार सिंह यूनीपेय टूयू ग्रुप की कंपनियों का एजेंट था। अप्रैल 2009 से जनवरी 2011 तक उसने पोंजी स्कीम योजना के तहत कंपनी के लिए निवेशकों से पैसे जमा किए थे। अरविंद कुमार और उसका भाई यागेंद्र प्रताप सिंह मिलकर ‘सिक्योर्ड लाइफ’ नाम से कंपनी चला रहे थे। कंपनी का आईसीआईसीआई बैंक में संयुक्त खाता था।

जांच के दौरान सामने आया कि कंपनी के खाते में 2 अप्रैल 2009 से 22 जनवरी 2012 तक 32,17,65,373 रुपये जमा हुए हैं। इसके बाद यह पैसा अन्य खातों में ट्रांसफर और कैश निकाला गया। पैसा अरविंद कुमार सिंह, योगेंद्र प्रताप सिंह, रीता सिंह, निखिल सिंह (अरविंद का बेटा), अश्ररिता (अरविंद की बेटी), पारसनाथ सिंह के खातों में भी ट्रांसफर हुआ है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : google
आरोपियों की भूमिका
अरविंद कुमार सिंह : ‘सिक्योर्ड लाइफ’ कंपनी में निवेश के नाम पर निवेशकों से 32 करोड़ रुपये से अधिक रुपये एकत्र किए। यह पैसे उसने परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए।
योगेंद्र प्रताप सिंह : ‘सिक्योर्ड लाइफ’ कंपनी में पार्टनर और 32 करोड़ रुपये निवेश में बराबर का आरोपी। पैसे परिवार के सदस्यों के खातों में ट्रांसफर किए। इसके अलावा कंपनी के नाम से तीन बड़ी प्रापर्टी भी खरीदी।
रीता सिंह : रीता का बैंक अकाउंट का इस्तेमाल पति अरविंद कुमार सिंह और योगेंद्र प्रताप करता था ताकि इस पैसे को ठिकाने लगाया जा सके।
पारस नाथ सिंह: ईडी की जांच के अनुसार, पारस नाथ सिंह के बैंक खातों में 1.43 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए थे। इसका इस्तेमाल उन्होंने अपने निजी खर्चों के लिए किया।

राकेश सिंह : सिक्योर्ड लाइफ कंपनी के नाम से दोनों भाइयों ने तीन जगह संपत्ति खरीदी थी। इनमें से सेक्टर-49 फरीदाबाद में एक विला और अरावली रिट्रीट स्कीम, तहसील सोहाना, गुड़गांव की प्रापर्टी में राकेश सिंह को मालिक बनाया गया था। उसने मनी लांड्रिंग के पैसों के इस्तेमाल में खुद के नाम जोड़ने की अनुमति दी।

पंकज सिंह: अंकल अरविंद और योगेंद्र की ओर से की गई मनी लांड्रिंग में बराबर का हिस्सेदार था। उनकी कंपनी में उनके साथ काम करता था। 

यह है मामला
चंडीगढ़ बेस मलेशियन कंपनी यूनीपेय टूयू मार्केटिंग प्राइवेंट लिमिटेड और यूनीगेटवे ट्रेडिंग कंपनी एक तय फीस के बाद ऑनलाइन सदस्य बनाती थी। कंपनी उन्हें डिजिटल वॉलेट की सुविधा उपलब्ध करवाती थी। कंपनी में देशभर से हजारों लोगों ने करोड़ों रुपया लगाया था। शुरुआत में कंपनी ने लोगों को बहुत मोटा रिटर्न दिया।

इससे लोगों का विश्वास कंपनी में बढ़ा तो उन्होंने और पैसा लगाया। कंपनी ने अक्तूबर 2010 में निवेशकों को महीने के महीने मिलने वाले रिटर्न को देना बंद कर दिया था। इससे निवेशकों से 600 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई। 
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