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पंजाब सीएम आवास में गूंज रहे थे ठहाके और चल रही थी किस्सागोई, मौका ही कुछ ऐसा था

Tue, 26 Dec 2017 01:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Captain Amarinder Singh
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कभी इस अंदाज में नजर नहीं आए, जैसे कि वे रविवार रात को थे। चंडीगढ़ स्थित सीएम आवास पर ठहाके गूंज रहे थे और चल रही थी किस्सागोई। किस्सों में जिक्र था फौज, घुड़सवारी, पोलो का। आखिर यह माहौल हो भी क्यों न, कैप्टन 58 साल बाद नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) के अपने साथियों से मिल रहे थे। 
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने डिनर पर एनडीए के अपने बैचमेट की मेजबानी की। इस मौके पर उन्होेंने एनडीए खड़कवासला के अपने बैच के 57 साथियों के साथ ट्रेनिंग के दिनों की पुरानी यादों और अनुभवों को ताजा किया। उनके साथियों ने कहा कि कैप्टन बढ़िया कैडेट थे और बेहतरीन घुड़सवारी करते थे। वे पोलो टीम के कप्तान भी रहे। हालांकि वे सभी प्रशिक्षण के बाद भारतीय फौज के विभिन्न विंगों में चले गए थे और फिर कभी कभार ही मुलाकात हुई। 

बचपन से ही हथियारों के प्रति आकर्षण महसूस करने वाले और खुद को फौज की वर्दी में देखने का सपना देखने वाले मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पल बेहद ही खास थे जब उनका यह ख्वाब पूरा हुआ। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जुलाई 1959 के उन पलों को याद किया, जब वह एनडीए में जार्ज (अब डेल्टा) स्कवाड्रन में शामिल हुए थे।
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यह स्कवाड्रन खड़कवासला झील के किनारे स्थित थी। अमरिंदर सिंह को 1963 में भारतीय फौज में कमीशन मिला था और वह सिख रेजिमेंट की दूसरी बटालियन में तैनात हुए थे। यह वही बटालियन थी, जिसमें उनसे पहले उनके पिता और दादा जी ने सेवा निभाई थी।
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यह एक सपने की तरह था : कैप्टन

Captain Amarinder Singh
यह एक सपने की तरह था : कैप्टन
फौजी से राजनीतिज्ञ बने कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि कई साल बाद अपने दोस्तों से मिलना उनके लिए एक सपने की तरह था। उन्होंने अगले वर्ष भी इस तरह के मिलन को जारी रखने की उम्मीद जाहिर की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन वह जीवन भर नहीं भूल सकते। 

किताब भी जारी की
इस अवसर पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल कमल डावर की लिखी ‘ट्रिस्ट विद परफिडी’ नाम की किताब भी जारी की। इस मौके पर लेफ्टिनेंट जनरल जीएस सहोता, लेफ्टिनेंट जनरल बीएम कपूर, लेफ्टिनेंट जनरल नटराजन, लेफ्टिनेंट जनरल कमल डावर, एयर चीफ मार्शल सिसोदिया, मेजर जनरल एमएस परमार, लेफ्टिनेंट जनरल प्रकाश सूरी, लेफ्टिनेंट जनरल नारायण चटर्जी, कोमोडोर नाथ और मेजर जनरल गुरजीत सिंह रंधावा शामिल थे।
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