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तेजाब बना ताकत: क्या थी? क्या बन गई पर गम नहीं

Wed, 24 Dec 2014 12:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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26 मई 2012 का दिन याद कर आज भी आंखें भर आती हैं। 2 साल 6 माह 27 दिन बाद रोहतक कोर्ट में फैसला आया। अदालत ने आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। लेकिन रितू फैसले के लिए भी नहीं रुकी। कोर्ट फैसला सुना रहा था तो रितू दिल्ली में राजौरी गार्डेन में एसिड हमले से घायल 26 वर्षीय चिकित्सक नम्रता कौर को सांत्वना दे रही थीं।
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दूसरों को हौसला दे रही रितू को फैसले का पता चला तो खुद के आंसू नहीं रोक पाई। तेजाब हमले ने उसकी जिंदगी बदल दी है। लेकिन तेजाब को कमजोरी बनाने की बजाय रितू ने इसे अपनी ताकत बना लिया। अपनी जैसी दूसरी बहनों के लिए रितू ने लंबी लड़ाई लड़ी।

संघर्ष में खुद के साथ उसके सहयोगियों और रिश्तेदारों को भी लाठियां खानी पड़ी। बावजूद हार नहीं मानी। आज जब फैसले की घड़ी आई तो संघर्ष के दिन आंखों में आंसू बनकर तैर गए। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में रितू का गला भर आया। कहा, न्याय से मैं संतुष्ट हूं। मैं चाहती हूं कि आरोपी जब सजा काटकर बाहर आएं तो वे दूसरों के लिए सबक बनें।
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5 दोषी करार, 3 को उम्रकैद

नेशनल खिलाड़ी पर तेजाब फेंकने के बहुचर्चित मामले में रोहतक कोर्ट ने 8 में से 5 आरोपियों को दोषी करार दिया है। मुख्य साजिशकर्ता सहित 3 दोषियों को उम्रकैद व 10-10 हजार रुपये और दो दोषियों को 10-10 साल कैद व 5-5 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। अन्य तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया है। पांचों दोषियों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा भी पीड़ित को देना होगा।

इनको सुनाई गई सजा
कोर्ट ने मामले में आरोपी अनाज मंडी जींद निवासी राजवंती, पिल्लूखेड़ा निवासी संजय व सोहन लाल को बरी कर दिया है। जबकि आरोपी सोनीपत के गांव जागसी निवासी रामनिवास व प्रदीप और पिल्लूखेड़ा के नीरज को उम्र कैद की सजा सुनाई है। अन्य दो आरोपियों में शहरशाहपुर बिहार निवासी राजूपुरी और अनाज मंडी जींद निवासी मंजीत को दस-दस साल की कैद की सजा सुनाई है।

तेजाब बेचने वाले को भी दस साल की कैद  
तेजाब कांड में आया फैसला दूसरों के लिए सबक बनेगा। मामले में मौके से ही गिलास और बाइक बरामद होने से तेजाब बेचने वाले को भी पकड़ा जा सका था। तेजाब बेचने वाले जींद जिले के खडरस गांव निवासी दुकानदार मूल रूप से बिहार निवासी राजू उर्फ राजपूरी को भी दस साल कैद की सजा सुनाई गई है। 

ये गवाह बने अहम

वकील ने बताया कि मामले में रितू खुद गवाह थी। उसकी गवाही अहम रही, जिसकी वजह से सजा हो सकी। तो दो गवाह उसके साथ चल रहे उसके भाई थे। जिन्होंने कोर्ट में गवाही दी थी।

साक्ष्य के अभाव में बच गए तीन आरोपी
योजना बनाने वाले तीन आरोपी सोहन लाल, संजय वर्मा और राजवंती साक्ष्य के अभाव में बरी हो गए हैं। जबकि मामले में सोहन लाल व संजय वर्मा को साजिश रचने का मुख्य आरोपी बनाया गया था।

इन लोगों ने रितु की बुआ रजवंती के घर पर यह साजिश रची थी। जहां एसिड फेंकने वाले आरोपियों से 1.25 लाख रुपये में डील हुई थी। इन दोनों ने एसिड फेंकने वालों को आश्वस्त किया था कि उनको पैसा मिल ही जायेगा। नहीं मिलेगा तो हम लोग देंगे।

हाईकोर्ट में देंगे चुनौती
तेजाब मामले के फैसले पर आरोपी पक्ष के वकील कुलदीप दांगी ने कहा कि वे फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। अब वह इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।

ये था एसिड अटैक का पूरा मामला

26 मई 2012 को शहर की वॉलीबाल खिलाड़ी और छात्रा रितू सैनी स्टेडियम से प्रेक्टिस कर घर लौट रही थी। जब वह प्रेम नगर चौक पर पहुंची तो दो बाइक सवार युवकों ने उस पर तेजाब फेंक दिया, इससे वह बुरी तरह झुलस गई।

हमले में रितू का 90 प्रतिशत चेहरा झुलस गया था और दाईं आंख की रोशनी भी चली गई थी। खुलासा हुआ कि रितू पर एसिड अटैक उसी के रिश्तेदार रामनिवास ने कराया था।

रामनिवास ने प्रदीप व नीरज नाम के दो युवकों को पैसे देकर यह हमला कराया था। इसके लिए आरोपी ने दोनों के साथ सवा लाख रुपये में सौदा किया था। रामनिवास रितू की बुआ का लड़का है और हमला जमीनी विवाद को लेकर किया गया था।

मिशेल ओबामा ने दिया था रितु को खिताब

रितू सैनी को इस लड़ाई में दिल्ली में तेजाब हमले की शिकार लक्ष्मी का साथ मिला। पीड़ितों की टीम उठ खड़ी हुई। टीम तेजाब हमले के खिलाफ और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए काम कर रही है। लक्ष्मी आंदोलन का प्रतीक बन गई हैं। मार्च 2014 में अमेरिका की फ र्स्ट लेडी मिशेल ओबामा ने दोनों को वुमन ऑफ  करेज का खिताब दिया था। न्याय के लिए जंतर मंतर पर 12 दिसंबर से 10 दिन तक धरना भी दिया।

सोशल मीडिया पर अपनों का सहारा
रितू सैनी ने सोशल मीडिया पर भी अभियान चला रखा है। फेसबुक पर एसिड अटैक फ ाइटर रितू के नाम से पेज बनाया गया है। रितू ने रोहतक कोर्ट का फैसला आते ही सबसे पहले इस पेज पर प्रतिक्रिया दी। रितू ने पोस्ट किया कि यह वो खबर है, जिसका मैं और मेरे सभी मित्र 26 मई 2012 से इंतजार कर रहे थे। इसलिए संभव हो पाया क्योंकि हर किसी ने मेरी और मेरे परिवार की सहायता की। साथ मिलकर लड़ाई लड़ी जाए तो सफ लता मिल ही जाती है।

अपने पैरों पर खड़ी है रितू
रितू दूसरों के लिए लड़ाई तो लड़ ही रही है, अपनी पांच साथियों के साथ आजीविका के लिए कैफे भी चला रही हैं। आगरा में शीरोज हैंगआउट नाम से कैफे की शुरुआत मानवाधिकार दिवस पर 10 दिसंबर को की गई है। यह सिर्फ  कैफे नहीं बल्कि यहां हैंडीक्राफ्ट प्रदर्शनी का भी इंतजाम है। पठन-पाठन से जुड़े लोगों के लिए यहां खास ख्याल रखा गया है।
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रितु ने अब सरकार से ये मांग की

एसिड की खुलेआम बिक्री पर पाबंदी लगे और खरीद फरोख्त के लिए नियामक बनाया जाए।एसिड अटैक के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित हो और 3 माह में फैसला।एसिड हमलों में पुलिस 15 दिन में चार्जशीट दाखिल करे।पीड़िता के लिए सरकारी मदद, नौकरी और जीविका का इंतजाम।सभी राज्यों में प्लास्टिक सर्जरी कराने के लिए बजट पास किया जाए।पीड़िता को नि:शुल्क मेडिकल सेवाएं उपलब्ध कराई जाए।
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