पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने नकली पहचान पत्र, आधार कार्ड, नोएडा से ड्राइविंग लाइसेंस भी तैयार करवा रखे थे। वह दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और यूपी के एरिया में छिपता रहा। आरोपी पर हत्या, हत्या का प्रयास और डकैती जैसे 25 मामले दर्ज है।
कट्टरपंथियों के संपर्क में
शुरुआती पूछताछ में आरोपी का कहना है कि वह कट्टरपंथी हैं और विभिन्न जेलों में रहने के चलते वह कुछ कट्टरपंथियों के संपर्क में है। वे उसे सुनियोजित कत्ल करने के लिए प्रेरित कर रहे थे। वह अपने नजदीकी साथी रछपाल सिंह उर्फ दोला निवासी गांव भुच्चर कलां जिला तरनतारन के साथ मिलकर बठिंडा के तलवंडी साबो और मौड़ एरिया में बैंक कैश वैन को लूटने की योजना बना रहा था। इसके लिए वह रेकी भी कर चुके हैं। 2019 में जेल से बाहर आने के बाद उसने रछपाल सिंह के साथ मिलकर सीमा पार से आधुनिक हथियार भी प्राप्त किए थे। फिलहाल वह तरनतारन में हुए कत्ल के मामले में फरार चल रहा था।
आरोपी तेजा की वकील बोली- पुलिस की सारी कहानी ही फर्जी
आरोपी तेजा की वकील कुलविंदर कौर का कहना है कि तेजा को पुलिस ने जानबूझकर झूठे मामले में फंसाया है। पुलिस की वर्दी अंबाला, जालंधर, पठानकोट शहरों के कई इलाकों पर आम मिल जाती है। इसके अलावा तेजा के पास से पुलिस का आईडी कार्ड बरामद होने की बात कही जा रही है। वह कहीं से भी प्रिंट किया जा सकता है और हथियार भी पुलिस प्लांट कर सकती है। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस की कार्रवाई सही होती तो तेजा को भरी अदालत में पेश करती। तेजा के घर वालों ने उन्हें फोन करके यह केस लड़ने के लिए कहा है।