लुधियाना के प्रतिष्ठित डॉक्टर दंपति को गन प्वाइंट पर बंधक बनाकर करोड़ों रुपये की लूट के मामले में कई खुलासे हो रहे हैं। जहां अपनी फजीहत बचाने के लिए पांच दिन तक कमिश्नरेट पुलिस ने इस पूरे मामले को ही दबाए रखा। वहीं डॉक्टर दंपती ने भी लुटी रकम के बारे में पुलिस को गुमराह किया। डॉ. वाहेगुरु पाल सिंह सिद्धू का लुधियाना में काफी नाम है। उनके पास चार देशों से मेडिकल जांच का लाइसेंस है।
क्राइम ब्रीफ तक में नहीं किया जिक्र
पांच दिन तक पुलिस लगातार पीड़ित के घर चक्कर लगाती रही, लेकिन महानगर के इतने बड़े डॉक्टर के घर से लूट की सूचना किसी को पता तक नहीं लगने दी। पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन पुलिस द्वारा दी जाने वाली क्राइम ब्रीफ में भी इसका जिक्र नहीं किया गया। शहर में हर समय लॉ एंड आर्डर ठीक होने का दावा करने वाली कमिश्नरेट पुलिस को डर था कि अगर यह सूचना बाहर निकली तो पुलिस की किरकिरी हो सकती है। जिस कारण पुलिस के अधिकारियों ने डॉ. दंपति को भी किसी से कोई बात न करने की हिदायत दे दी थी।
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लूट की वारदात के बाद दो दिन तक तो डॉ. दंपति ने किसी का चेकअप भी नहीं किया। जब घर बार बार पुलिस घर आई तो सारा मामला खुल गया। हालांकि तब तक पुलिस को भी लीड मिल चुकी थी और मामले में खुलासा हो गया था।
बरामदगी से पुलिस हुई हैरान
पुलिस उस समय हैरान हो गई जब लुटेरों को काबू कर उनसे लूटी गई रकम बरामद की गई। दरअसल डॉक्टर दंपती ने पुलिस को लूटी गई रकम 25 लाख लिखवाई थी, लेकिन लुटेरों से साढ़े तीन करोड़ रुपये बरामद हुए। घर में करोड़ों रुपये की लूट का डॉक्टर दंपति को पता था, लेकिन आयकर विभाग से बचने के लिए उन्होंने पुलिस को लूट की रकम के बारे में गलत जानकारी दी।
घर में करोड़ों रुपये की नकदी देख लुटेरे भी हुए परेशान
पुलिस कमिश्नर मंदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि लुटेरों की सोच के मुताबिक घर में 20 से तीस लाख रुपये की नकदी का अनुमान था,. लेकिन जब घर में करोड़ों रुपये की नकदी देखी तो लुटेरे भी परेशान हो गए। उन्हें समझ में नहीं आया कि पैसे इतने लेकर जाए तो जाए कैसे। इसके बाद उन्होंने डॉ. दंपति के ही घर में रखी दो बड़ी अटैचिया ली और उनमें पैसे लेकर फरार हो गए। अब इतने सारे पैसे किसी दूसरे राज्य में लेकर फरार होना भी खतरा था तो आरोपी अमृतसर में होटल फेयरवे में किराए का कमरा लेकर रुके। उन्होंने वहां सारे पैसे रखे और कमरा नहीं छोड़ा।
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सीसीटीवी कैमरे की मदद से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
पुलिस ने मामले की जांच की तो पता चला कि लुटेरे सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर साथ ले गए थे। उसके बाद पुलिस ने सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगे सीसीटीवी कैमरे और आस-पास के सभी सीसीटीवी कैमरे चेक किए तो पुलिस को गाड़ियों और उस पर लगे नंबरों का पता चला। लीड मिली तो पुलिस को आरोपियों के बारे में जानकारी हासिल हुई। इसके बाद चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लियाय गया। अमृतसर के होटल में जाकर पुलिस ने पैसे भी रिकवर कर लिए।
पुलिस के मुताबिक आरोपी गुरविंदर सिंह और पवनीत सिंह के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज है। वह जमानत पर जेल से बाहर आए हुए है। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि पैसे ओर भी हो सकते हैं और इस लूटकांड को अंजाम देने में कुछ ओर लोग भी शामिल हो सकते हैं।
कमिश्नरेट पुलिस को मिला पांच लाख रुपये का इनाम और डीजीपी ड़िस्क
पुलिस कमिश्नर मंदीप सिंह सिद्धू ने कहा कि इस मामले को हल करने के लिए डीजीपी गौरव यादव की तरफ से लूट मामला हल करने वाली टीम को पांच लाख रुपये का नकद इनाम और इस टीम में शामिल सदस्यों को डीजीपी डिस्क देकर सम्मानित किया जाएगा।