आरोपी को कोर्ट ले जाती पुलिस
इस मामले में हांसी शहर थाना पुलिस ने एफआईआर नंबर-116 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 302, 307, 395, 397, 427, 436 और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस ने 23 फरवरी 2016 को केस दर्ज कर इस मामले की जांच शुरू की थी। वीडियो फुटेज और बयानों के आधार पर पवन, सुरेंद्र और दलजीत इसमें आरोपी बनाए गए थे। अदालत ने इन्हें 24 जनवरी को दोषी करार देते हुए सजा 30 जनवरी को सुनाने का फैसला दिया था।
यह था मामला
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 20-21 फरवरी 2016 को हांसी के ढाणी पाल में दलजीत ने अपने साथियों के साथ मिलकर आगजनी, लूटपाट जैसी घटनाओं को अंजाम दिया था। ढाणी में रहने वाली चचेरी बहन शांति का हाल जानने के लिए मिंटू व कृष्ण 22 फरवरी को बाइक पर सवार होकर वहां गए थे। दोपहर बाद 2 बजे 80 से अधिक हमलावर वहां पहुंच गए और उन पर हमला बोल दिया।
इस दौरान फायरिंग भी की गई। मिंटू व कृष्ण जान बचाने के लिए खेतों की ओर भाग खड़े हुए तो हमलावरों ने उनकी तरफ गोलियां चलाईं, जिसमें दोनों घायल हो गए थे। कृष्ण को कुछ लोगों ने अस्पताल पहुंचाया, लेकिन मिंटू उस समय नहीं मिला था, लेकिन अगले दिन गोलियों से छलनी हुआ उसका शव ढाणी के खेतों में मिला था।
किस धारा के तहत क्या सजा सुनाई
धारा - सजा - जुर्माना
148 - 3 साल कैद - 1000 रुपये
302/149 - आजीवन कारावास - 5000 रुपये
307/149 - 7 साल कैद - 5000 रुपये
397/149 - 7 साल कैद --
427/149 - 2 साल कैद - 500 रुपये
436/149 - 10 - 5000 रुपये
नोट - इसके अलावा आर्म्स एक्ट में तीनों को एक-एक हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
इस मामले में दोषी करार दिया गया दलजीत उर्फ जलजीत पहले से सजायाफ्ता है। उप जिला न्यायवादी राजीव सरदाना ने बताया कि दजलीत को हांसी के सदर थाना में राम अवतार की शिकायत पर एफआईआर नंबर-80 के तहत 23 फरवरी 2016 को दर्ज मामले में एडीजे आरके जैन की अदालत द्वारा पांच साल कैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
दलजीत तोड़फोड़ करने, सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने, फॉरेस्ट एक्ट के तहत दोषी पाया गया था। इस मामले में उसके साथ तीन अन्य राजू, सूरज और विनोद को सजा हुई थी और सभी को करीब 60-60 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया था।
अलग से शुरू होगी दलजीत की सजा
पब्लिक प्रोसीक्यूटर राजीव सरदाना ने बताया कि दलजीत चूंकि पहले से पांच साल की सजा काट रहा है, इसलिए अदालत से उसे उस सजा के बाद इस सजा के शुरू होने की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने मान लिया। दलजीत को पहले पूर्व की पांच साल की सजा काटनी होगी और उसके बाद उसकी अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की वर्तमान सजा शुरू होगी।