दो फर्जी एनकाउंटर केसों में कोर्ट ने मंगलवार को एक एसपी समेत आठ पुलिस अधिकारियों व मुलाजिमों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। 22 साल पुराने इस केस में दोषियों ने एनकाउंटर में दिल्ली के एक कथित आतंकवादी समेत एक कांस्टेबल को फर्जी एनकाउंटर में मार गिराया था।
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सरकारी वकील एचपीएस वर्मा ने बताया कि जिला जालंधर के लांबरा थाने की पुलिस सितंबर 1992 में ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली से टाडा एक्ट में गिरफ्तार कथित आतंकवादी विजयपाल सिंह को गिरफ्तार करके सीआईए स्टाफ जालंधर लेकर आई थी।
इस केस में बाद में पुलिस ने विजयपाल सिंह के साथ जालंधर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में लगे कांस्टेबल मुख्तियार सिंह, कांस्टेबल राजविंदर सिंह और संगरूर में लडाकोठी में तैनात कांस्टेबल बलजीत सिंहकी संलिप्तता होने का दावा करते हुए मुख्यितार सिंह व राजविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि कांस्टेबल बलजीत सिंह को फरार बताया गया था।
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इसी बीच चार सितंबर 1992 की रात को 21 पुलिस मुलाजिम व अधिकारी कथित आतंकी विजयपाल सिंह, कांस्टेबलों राजविंदर, मुख्तियार सिंह को विस्फोटक सामग्री बरामद कराने अपनी गाड़ी में लेकर जा रही थी।
लांबरा थाने से करीब 15 किलोमीटर दूर गांव चिटी के पास पुलिस ने एनकाउंटर करके विजयपाल सिंह को मार गिराया, जबकि दोनों कांस्टेबलों के बारे में कहा कि वह मौके से फरार हो गए।
दोषी पाते हुए कोर्ट ने उम्रकैद व जुर्माने की सजा सुनाई
पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने उन पर हमला किया और उन्हें जवाब में फायरिंग करनी पड़ी। इस केस में सीबीआई स्पेशल जज कुलदीप सिंह की कोर्ट ने आज रिटायर एसपी राम सिंह, एसआई अजीत सिंह, हेड कांस्टेबल अजायब सिंह, एसआई अमरीक सिंह, एएसआई हरभजन सिंह को धारा 302, 120-बी, 218, 364 आईपीसी में दोषी पाते हुए उम्रकैद व 8500-8500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जबकि बाकी 15 आरोपियों हेडकांस्टेबल अशोक कुमार, गुरजीत सिंह, हेडकांस्टेबल साजन सिंह, एएसआई रणजीत कुमार, एएसआई शिवदेव सिंह, एएसआई अश्विनी कुमार, निशान सिंह, एएसआई बलकार सिंह, कांस्टेबल गुरमीत सिंह, हरिंदर सिंह, बलविंदर सिंह, सर्बजीत सिंह, एएसआई जगजीत सिंह, कांस्टेबल गुरबख्श सिंह, एएसआई हरपाल सिंह को बरी कर दिया। जबकि एक की सुनवाई दौरान मौत हो गई थी।
दूसरे केस में सीबीआई स्पेशल जज कुलदीप सिंह की कोर्ट ने दिल्ली के कथित आतंकवादी विजयपाल सिंह के साथ संलिप्तता के आरोपी संगरूर में लडाकोठी में तैनात कांस्टेबल बलजीत सिंह को फर्जी एनकाउंटर केस में मारने के दोषी एएसआई सुखवंत सिंह, कांस्टेबल नंद सिंह, हवालदार रजिंदर सिंह को धारा 302, 120-बी, 218, 364 आईपीसी के तहत उम्रकैद और 5500-5500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
सरकारी वकील एचपीएस वर्मा ने बताया कि दोषियों के मुताबिक एक सितंबर 1992 की रात को उन्होंने नकोदर थाने के तहत जगराल में नाका लगा रखा था, इसी दौरान तीन व्यक्ति आए, जिन्होंने उन पर हमला किया। जवाबी फायरिंग में फरार कांस्टेबल बलजीत सिंह मारा गया, जबकि दो भागने में सफल रहे। इस केस में कोर्ट ने कांस्टेबल फुमन सिंह को आरोपों से बरी कर दिया है।