फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

IAS एकेडमी में रही 'महिला जासूस' का सनसनीखेज खुलासा

Fri, 03 Apr 2015 05:42 PM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक एकेडमी में फर्जी आईएएस बनकर रहने के आरोप में घिरी युवती रूबी चौधरी ने एकाएक सामने आकर कई सनसनीखेज खुलासे किए। छह महीने तक एकेडमी में रहने की बात को नकारते हुए गुरुवार को मीडिया से बातचीत में उसने दावा किया कि वह एकेडमी में नौकरी हासिल करने के सिलसिले में बस आती-जाती रही है।
विज्ञापन


रूबी ने संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर सौरभ जैन को कठघरे में खड़ा करते हुए उन पर आरोप लगाया कि नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे 20 लाख का सौदा हुआ था। पांच लाख वह एडवांस भी दे चुकी है। रूबी ने बताया कि पिछले साल जुलाई में दिल्ली के विज्ञान भवन में नेशनल अवार्ड समारोह के दौरान डिप्टी डायरेक्टर सौरभ जैन से मुलाकात हुई थी।

रूबी के अनुसार जैन ने उसे बताया कि अकादमी की लाइब्रेरियन जल्द सेवानिवृत्त होने वाली हैं। इस पद पर रूबी को नौकरी मिल सकती है। कई दौर की बातचीत के बाद सौरभ जैन ने इस नौकरी के बदले 20 लाख रुपए की डिमांड की। रूबी ने पति और परिजनों की मदद से पांच लाख रुपए जमा किए।
विज्ञापन


आरोप है कि पहली किस्त में सवा लाख रुपए डिप्टी डायरेक्टर को उनके ऑफिस में दिए गए, जबकि पौने चार लाख मसूरी के लाइब्रेरी चौक पर सुपुर्द किए गए। इसी बीच जैन ने अकादमी में प्रवेश के लिए उसे फर्जी आई कार्ड बनाकर दिया। उसने इस आपत्ति भी जताई थी।

मुंह बंद रखने को पांच करोड़ की ऑफर

रूबी ने दावा किया कि वह अकादमी में कभी ठहरी नहीं, बल्कि 29 सितंबर से लगातार दिन में आती-जाती रही। उसने हर बार असली नाम और पता लिखकर अकादमी में एंट्री की। नौकरी के लिए बार-बार गुमराह किए जाने के कारण वह 18 मार्च को अपने पति वीरेंद्र मलिक और भाई को लेकर एलबीएस अकादमी पहुंची थी।

उस दिन डिप्टी डायरेक्टर से गरमागरमी हो गई थी। रूबी के अनुसार इसके बाद ही डिप्टी डायरेक्टर ने उसे फंसाने के लिए पूरा प्रपंच रचा। वह हर जांच का सामना करने को तैयार है, लेकिन झांसा देकर रकम ऐंठने और फर्जी कार्ड बनाने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

रूबी ने यहां तक कहा कि नौकरी के नाम पर रिश्वत लेने और अकादमी में आने-जाने के बारे में डायरेक्टर राजीव कपूर भी वाकिफ थे। मीडिया से बात करने के बाद रूबी चौधरी आर्मी लिखी स्विफ्ट डिजायर कार में बैठकर बयान दर्ज कराने के लिए सीधे नेहरू कॉलोनी थाने पहुंच गई।

रूबी चौधरी ने यह भी कहा कि बुधवार से उन्हें फोन कर मुंह बंद रखने के लिए लालच दिया जा रहा है। कहा गया कि यदि वह चुप रहे तो पांच करोड़ रुपये मिल जाएंगे, लेकिन वह दबाव और लालच के सामने झुकने को तैयार नहीं है।

जांच के लिए एसआईटी का गठन
मामले की जांच के लिए पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने एसआईटी का गठन किया है। सीबीसीआईडी की एसपी शाजिया अंसारी को इसका प्रभारी बनाया गया है। टीम में जनपद पुलिस भी होगी।

उधर, अकादमी के संयुक्त निदेशक डी नरियाला ने बताया कि रूबी चौधरी दो बार अकादमी परिसर में आई थी। वह सिक्योरिटी गार्ड के कमरे में ठहरी थी। गार्ड देव सिंह को निलंबित कर आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

सवा पांच घंटे चली पूछताछ

फर्जी आईएएस बनकर मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में युवती के रहने की जांच कर रही एसआईटी ने आरोपी रूबी चौधरी से सवा पांच घंटे तक पूछताछ की। बताया जा रहा है कि 14 पन्नों के बयान में रूबी से कई जरूरी तथ्यों की जानकारी ली गई है।

बृहस्पतिवार को मामले की जांच हाथ में आने के बाद एर्सआईटी टीम ने शाम साढ़े चार बजे रूबी चौधरी से पूछताछ शुरू की। रात पौने दस बजे पूछताछ खत्म हुई। सूत्रों के अनुसार इस दौरान रूबी के अकादमी उपनिदेशक पर लगाए गए आरोपों के बाबत भी जानकारी जुटाई र्गई है।

उससे पूछा गया कि उसने अकादमी में लाइब्रेरियन की नौकरी के लिए सौदा कब, किससे और कैसे किया। रकम कब, कहां, किसे सौंपी गई। इसके अलावा यह भी पूछा गया है कि सौदे के वक्त कौन लोग मौजूद थे। रूबी के अकादमी में प्रवेश, आईडी कार्ड लेने आदि के बारे में भी जानकारी ली गई। सूत्रों का कहना है कि अपने बयान में रूबी ने कुछ अन्य लोगों के भी नाम लिए हैं। अब एसआईटी टीम इन लोगों से पूछताछ की तैयारी में है।

उधर, एसपी सीबीसीआईडी और एसआईटी की प्रभाराी शाजिया अंसारी का कहना है कि वह इस मामले में कुछ भी बताने के लिए अधिकृत नहीं हैं। उनका कहना है कि वरिष्ठ अधिकारी ही इस पर जानकारी दे सकते हैं। अंसारी का कहना है कि यह जांच गोपनीय है। रूबी के बयानों के आधार पर मिली जानकारी पर जो तथ्य सामने आएंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी।

आरोपों पर पुलिस ने दी सफाई
आईएएस अकादमी फर्जीवाड़े के मामले में लग रहे आरोपों पर दून पुलिस ने सफाई पेश की है। एसपी सिटी का कहना है कि पुलिस की जिम्मेदारी हर पक्ष की बात सुनने की है। ऐसे में पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करना गलत है।

आईएएस अकादमी में फर्र्जीवाड़े की आरोपी रूबी चौधरी ने बृहस्पतिवार को यह कहकर हड़कंप मचा दिया था कि वह दो दिन से एसपी सिटी अजय सिंह के संपर्क में थी। पुलिस मामले की जांच कर ही रही थी कि मामला एसआईटी को सौंप दिया गया था। इसके बाद यह कयास लगाए जाने लगे कि पुलिस के निष्पक्ष होने पर संदेह के चलते यह कदम उठाया गया है।

हालांकि, देर रात एसपी सिटी अजय सिंह सामने आए और इस पर सफाई दी। एसपी सिटी का कहना है कि यह मामला दो पक्षों के बीच का है। पुलिस ने आईएएस अकादमी की बात सुनी। मुकदमा दर्ज किया, लेकिन दूसरे पक्ष की भी बात सुननी होती है। यह कानूनी प्रक्रिया और जांच का हिस्सा होता है। ऐसे में रूबी से संपर्क पर सवाल उठाना गलत है।

रूबी कहां है, यह जानकारी होने पर भी उसे न पकड़ने के सवाल पर एसपी का कहना था कि अभी उन्हें हिरासत में नहीं लिया जा सकता था। अभी जांच चल रही है। लिहाजा रूबी को कहा गया था कि वह जहां चाहें रहें, लेकिन पूछताछ के लिए बुलाने पर आना होगा। रूबी ने इस पर हामी भी भरी थी और पूछताछ के र्लिए आई भी।

होटल में रूबी के आईडी न देने पर उन्होंने कहा कि यह बात गलत है। होटल में रूबी ने अपनी आईडी जमा कर्राई है, कुछ लोग बेवजह पुलिस पर आरोप लगाकर गुमराह कर रहे हैं। एसपी सिटी का कहना है कि मामले में जांच दोनों पक्षों की होनी चाहिए, लेकिन जबरन पुलिस की जांच की जा रही है। जबकि इस मामले में पुलिस की कोई भूमिका नहीं है।

पिछले दरवाजे से निकल गए सौरभ जैन
डिप्टी डायरेक्टर सौरभ जैन पर रूबी चौधरी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद गुरुवार को दिनभर मसूरी स्थित एलबीएस अकादमी में हलचल रही। हालांकि मुख्य गेट पर सन्नाटा पसरा रहा, लेकिन सूत्र बताते हैं कि परिसर के अंदर यह प्रकरण हर किसी की जुबां पर है।

वहीं, आरोपों के बाबत बयान लेने पहुंचे मीडिया कर्मियों से जैन ने दूरी बनाकर रखी। बताया जा रहा है कि वे अकादमी के मुख्य गेट के बजाय पीछे के दरवाजे से अपने आवास की ओर निकल गए, जबकि मीडियाकर्मी मुख्य गेट पर उनका इंतजार करते रह गए।

आंतरिक जांच शुरू
अकादमी के संयुक्त निदेशक डी नरियाला ने मीडिया को एक लिखित बयान मेल पर भेजा है, जिसमें उन्होंने बताया कि रूबी चौधरी दो बार अकादमी परिसर में आई थी। वह सिक्योरिटी गार्ड के कमरे में ठहरी थी। इस पर गार्ड देव सिंह को निलंबित कर दिया गया है। मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

गेस्ट हाउस में बिना आईडी के एंट्री

आरोपों से घिरी रूबी चौधरी पर पुलिस कुछ ज्यादा ही मेहरबान नजर आई। विधानसभा के सामने स्थित सुप्रीम गेस्ट हाउस के सूत्रों के मुताबिक बुधवार शाम पांच बजे के करीब एक महिला दारोगा आरोपी रूबी चौधरी और एक अन्य पुरुष को लेकर आई थी। कहने के बाद भी महिला ने आईडी नहीं जमा कराई।

गुरुवार को मीडिया का जमावड़ा लगा तो गेस्ट हाउस संचालकों में हड़कंप मच गया। सवाल उठता है कि आखिर पुलिस ने नियमों का पालन कराने में कोताही क्यों बरती गई।

हंगामे के बाद रूबी के बयान दर्ज
मीडिया से बात करने के बाद रूबी चौधरी गुरुवार दोपहर सीधे नेहरू कॉलोनी थाने पहुंची। उसका आरोप था कि पुलिस दो दिन से लगातार बयान दर्ज करने के बजाय उसे गुमराह कर रही है।

बाद में एसआईटी प्रभारी और सीबीसीआईडी की पुलिस अधीक्षक शाजिया अंसारी ने रूबी चौधरी को एसओजी आफिस में बुलाकर करीब एक घंटे तक बयान दर्ज कि ए। बयान में रूबी ने अपने आरोपों को दोहराया।

जांच के लिए एसआईटी का गठन
मामले की जांच के लिए पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने एसआईटी का गठन किया है। सीबीसीआईडी की एसपी शाजिया अंसारी को इसका प्रभारी बनाया गया है। टीम में जनपद पुलिस भी शामिल रहेगी।

नहीं बख्शे जाएंगे दोषी
एलबीएस अकादमी में महिला के फर्जी आईएएस के ठहरने के मामले की तह तक जांच की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। रूबी चौधरी द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच भी होगी।
- बीएस सिद्धू, पुलिस महानिदेशक

तीन दिन में चार बार बदली जांच
एलबीएस अकादमी में महिला के फर्जी आईएएस बनकर रहने के मामले में तीन दिन में तीन बार जांच बदल दी गई। मंगलवार शाम को मुकदमा दर्ज होने के बाद पहले विवेचना मसूरी निरीक्षक एचसी भंडारी को सौंपी गई थी।

रातों-रात उनका तबादला होने के बाद नए तैनात किए गए निरीक्षक चंदन सिंह बिष्ट को जांच का जिम्मा मिला। बुधवार शाम जांच सीओ मसूरी से कराने की घोषणा की गई है। जबकि, गुरुवार को एसआईटी गठित कर जांच कराने का फैसला लिया गया।
विज्ञापन

गार्ड बना बलि का बकरा!

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में महिला के फर्जी आईएएस के रूप में ठहरने के मामले में दोषी अधिकारियों को बचाने के लिए गार्ड को बलि का बकरा तो नहीं बनाया गया? इस मामले में अब तक सामने आए तथ्य तो इसी ओर इशारा कर रहे हैं। अकादमी प्रशासन ने गार्ड को गुनहगार साबित करने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन रूबी चौधरी के सामने आने के बाद कहानी उलझ गई है।

मुजफ्फरनगर के कुटबा निवासी रूबी चौधरी के सामने न आने के कारण अब तक अकादमी प्रशासन द्वारा बताई कहानी के आधार पर ही पुलिस जांच होती रही। सूत्रों की मानें तो फजीहत से बचने के लिए कुछ अधिकारियों ने दूसरी ही पटकथा तैयारी कर दी, जिसमें पूरे मामले के लिए सीधे तौर पर गार्ड को दोषी ठहराया गया है।

एक पुलिस अधिकारी की मानें तो प्राथमिक जांच में यही कहा गया कि अकादमी के किसी अधिकारी से रूबी चौधरी का कोई जुड़ाव नहीं रहा। वह तो सिर्फ गार्ड की मदद से उसके कमरे में आती-जाती रही। राष्ट्रपति के साथ ट्रेनी की वर्दी में फोटो खिंचवाने के बाद रूबी अकादमी प्रशासन की नजरों में आई।

जांच पड़ताल में उसके फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ तो मुकदमा दर्ज कराया गया। इसी कहानी को पुख्ता करते हुए गार्ड को निलंबित कर बेदखल कर दिया गया। सब कुछ पटकथा के अनुरूप ही हो रहा था, लेकिन रूबी चौधरी ने डिप्टी डायरेक्टर को निशाना बनाकर कहानी पलट दी।

नतीजा यह हुआ कि पुलिस अफसरों ने आनन-फानन में पुलिस से जांच लेकर एसआईटी का गठन कर दिया गया। अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि एसआईटी की जांच का रुख क्या रहेगा।

रूबी के बयान के बाद इस मामले में कई सवाल खड़े हो गए हैं। फर्जी आईएएस बनकर छह माह तक अकादमी में ठहरी रूबी चौधरी की सांठगांठ किन-किन अधिकारियों से थी। एसडीएम का फर्जी आई कार्ड बनाकर उसे अकादमी के गार्ड के कमरे में रखने का क्या मकसद था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें