बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में पिछली तारिख पर कोर्ट में जमा कराए गए डिकोडेड डाटा से एक बार फिर 10 मोबाइल नंबरों की लोकेशन एक जगह पर होना साबित हो गया है। मोबाइल कंपनी के नोडल ऑफिसर अच्युत अग्रवाल का कोर्ट में क्रॉस एग्जामिनेशन हुआ, जिसमें उन्होंने साफ किया की जिन नंबरों का डाटा कोर्ट में दिया गया है, उनकी लोकेशन एक टावर के इर्द-गिर्द है।
वहीं पुलिस की तरफ से पहले चार्जशीट में दिए गई कॉल डिटेल व फोन लोकेशन में भी सभी नंबर एक साथ चल रहे हैं। इन नंबरों में मुख्य आरोपी राम कुमार चौधरी, मृतका ज्योति व अन्य आरोपियों के फर्जी पते पर लिए गए नंबर हैं।
डाटा में कुछ नंबर मिस
हालांकि बचाव पक्ष की तरफ से सवाल उठा की डाटा में कुछ नंबर मिस हैं, लेकिन क्रॉस में साफ हो गया कि जो नंबर पहले हिमाचल में चल रहा है और उसके बाद पंजाब में आ गया, तो वह हिमाचल के डाटा में मिस हो जाएगा।
इसके अलावा एसीपी धर्मबीर सिंह के भी कोर्ट में बयान दर्ज हुए। जिसमें उन्होंने केस से संबंधित सभी रिपोर्टस के बारे में बताया। बचाव पक्ष की तरफ से उस नर्सिंग होम की फुटेज के बारे में पूछा गया, जहां पुलिस चार्जशीट के मुताबिक ज्योति का गर्भपात हुआ था, इस पर जवाब दिया कि डिलिट हुआ डाटा रिटराइव हो गया था, लेकिन प्ले नहीं हुआ। उसे प्ले करने के लिए दूसरी लैब में भेजा गया है, जहां से रिपोर्ट नहीं आई।
क्या होता है डिकोडेड डाटा
डिकोडेड डाटा में सेल आईडी और वह कहां-कहां चला टावर के हिसाब से मिल जाता है। पुलिस सिर्फ सेल आईडी ले सकती है, लेकिन वह किस जगह की आईडी है, वह पता नहीं चलता। यह सिर्फ मोबाइल कंपनी ही बता सकती है। डिकोडेड डाटा में यह पता चल जाता है कि किस फोन पर कौन से टावर की रेंज है।
इस लिए लिया गया था डिकोडेड डाटा
पुलिस ने चार्जशीट में कॉल डिटेल और फोन लोकेशन सेल आईडी के हिसाब से कोर्ट में दे दी थी। वहीं पुलिस डिकोडेड डाटा के इंतजार में थी, जो मोबाइल कंपनी से मिलना था। डिकोडेड डाटा में पुलिस सेल आईडी और लोकेशन को पूरी तरह से क्लीयर करना चाहती थी। अब जब डिकोडेड डाटा मिला तो 311 सीआरपीसी की अर्जी लगाकर डाटा कोर्ट में जमा करा दिया था।