आरोपी के बारे में जानकारी देते हुए एसटीएफ अधिकारी
एसटीएफ सोनीपत की दो टीमों ने सोमवार को जींद और झज्जर में एक साथ रेड करके अवैध हथियार बनाने की दो फैक्टरियों का भंडाफोड़ किया है। इस दौरान चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 17 अवैध हथियार के अलावा करीब 100 हथियार बनाने वाला सामान बरामद किया गया गया है।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि पकड़े गए आरोपी करीब छह दशक से पीढ़ी दर पीढ़ी हथियार बनाने के गोरखधंधे से जुड़े हैं। आरोपियों के खिलाफ झज्जर और जींद में मामले दर्ज किए गए हैं। पकड़े गए आरोपी आनंदपाल से लेकर बिदरो जैसे कुख्यात बदमाशों के गिरोह को हथियार सप्लाई करते थे।
एसटीएफ प्रभारी डीआईजी सतीश बालन ने सोमवार को सोनीपत के सेक्टर-3 स्थित एसटीएफ कार्यालय में पत्रकारों को बताया कि डीएसपी राहुल देव को सूचना मिली थी कि झज्जर और जींद में अवैध हथियार बनाने की फैक्टरी चलाई जा रही है। इसके बाद उन्होंने एसआई बिजेंद्र भंडारी व इंस्पेक्टर सतीश देशवाल की टीम बनाकर जींद और झज्जर में रेड कराई।
दूसरी ओर, जींद शहर के भिवानी रोड पर विकास नगर के एक घर में भी एसटीएफ टीम ने सोमवार सुबह छापा मारकर अवैध हथियार बनाने की फैक्टरी का खुलासा किया। पुलिस ने मौके से पांच तैयार पिस्तौल, तीन अधूरे तैयार और भारी मात्रा में अवैध हथियार बनाने का सामान बरामद किया है।
पुलिस ने मौके से दो लोगों को हथियार बनाते काबू किया, जबकि एक युवक फरार होने में कामयाब हो गया। पुलिस गिरफ्तार लोगों को सोनीपत लेकर गई। आरोपी की पत्नी और पड़ोसियों ने आरोपों को निराधार बताया है। आरोपी की बेटी ने कहा कि तीन दिन पहले पुलिस आई थी, उस समय कुछ सामान बरामद करके ले गई थी।
बड़े गैंगस्टर को करते थे सप्लाई
दबिश के दौरान बरामद हथियार
वहीं, सतीश देशवाल की टीम ने झज्जर के बहराणा गांव में दबिश देकर दिलबाग उर्फ बाबा, सुनील उर्फ अंगूर को काबू किया। उनसे भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद किए हैं। उनके खिलाफ झज्जर में मामला दर्ज किया है। सतीश बालन ने बताया कि एसटीएफ के गठन के बाद से लगातार बड़े बदमाशों को काबू किया जा रहा है।
इन्हें करते थे हथियार सप्लाई
गिरफ्तार आरोपियों ने खुलासा किया है कि वह राजस्थान के गैंगस्टर आनंदपाल, हरियाणा के संपत नेहरा, संजीत बिदरो, राजेश भारती, बलराज भाटी, सुनील चून, विक्की चिटाना, अशोक डोगा जैसे कुख्यात बदमाशों को हथियार सप्लाई करते रहे हैं। वह डिमांड के अनुसार हथियार तैयार करते थे। अब तक वह सैकड़ों हथियार बनाकर सप्लाई कर चुके हैं। साथ ही स्थानीय छोटे-मोटे बदमाशों को भी यही हथियार देते थे।
छह दशक से बना रहे हाईटेक हथियार
आरोपियों ने खुलासा किया है कि उनके परिजन करीब छह दशक से हथियार बनाते रहे हैं। लुहार जाति से संबंधित परिवार होने के चलते यह घरों में हथियार बनाते थे। परिवार के सदस्य पहले भी हथियार बनाने के आरोप में पकड़े गए हैं। उन्हें वर्ष 2015 में काबू किया गया। करीब दस माह जेल में रहने के बाद जमानत मिल गई। जमानत पर आने के कुछ दिन बाद में फिर ध्ांधा शुरू कर दिया। उनके कब्जे से बरामद हुए कई हथियार काफी आधुनिक हैं। 315 बोर की पिस्टल में ऐसा प्रबंध किया गया कि इसकी गोली बदलने में कुछ सेकेंड का ही समय लगे। जिससे अधिक से अधिक फायर किए जा सकें।
500 रुपये में बनाकर दो लाख तक में बेचते थे हथियार
आरोपियों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह अवैध हथियार को 10 हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक में बेचते थे। तमंचा 10 हजार का था, लंबी दूरी तक मार करने वाली बंदूक को दो लाख तक में बेचते थे। रिवॉल्वर का रेट 30 हजार से 50 हजार रुपये के बीच था। एक हथियार बनाने में उनका खर्च 300 से 500 रुपये तक आता था।
इन्हें गिरफ्तार किया गया
पुलिस ने झज्जर के गांव बहराणा निवासी दिलबाग उर्फ बाबा, सुनील उर्फ अंगूर के अलावा मूलरूप से बहराणा फिलहाल जींद के विकास नगर निवासी विनोद उर्फ खेमा व मूलरूप से दिल्ली के हमीदपुर फिलहाल विकास नगर निवासी दीपक उर्फ गोलू को गिरफ्तार किया है।