चंडीगढ़ पुलिस की साइबर सेल ने ऑनलाइन ठगी के एक हाई-प्रोफाइल मामले में कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है।
पीड़िता मनजीत कौर को 11 जुलाई को एक कॉल आई, जिसमें खुद को सीबीआई अधिकारी सुनील बताकर कॉलर ने दावा किया कि उनके आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहा है। फर्जी दस्तावेज और पासबुक व्हाट्सएप पर भेजकर महिला को डराया गया और उन्होंने भयवश 1.01 करोड़ रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
मेरठ से परवेज चौहान (33) सिम बॉक्स संचालित करता था और विदेशी हैंडलर्स से यूएसडीटी में भुगतान लेता था। लुधियाना में विजय शाह व कृष्णा शाह (नेपाल निवासी) फर्जी पीओएस आईडी से दो सिम एक्टिवेट कर एक को आकाश कुमार तक पहुंचाया।
अमृतसर से शुभम मेहरा उर्फ सनी (25): सोशल मीडिया के ज़रिए विदेशी नेटवर्क से जुड़ा था। उसे 25,000 मासिक वेतन पर सिम बॉक्स दिए गए थे।
सुहैल अख्तर: आकाश से सिम खरीदकर शुभम तक पहुंचाता था।
आकाश कुमार: 180 सिम अजीत कुमार से खरीद चुका था।
अजीत, सरोज और अभिषेक कुमार 250 रुपये में एक सिम उपलब्ध करवाते थे। विपिन कुमार नेटवर्क को फंडिंग देता था।
एसपी साइबर गीतांजलि खंडेलवाल ने बताया कि सिम बॉक्स एक ऐसा उपकरण है जिसमें दर्जनों सिम कार्ड लगाकर इंटरनेट कॉल्स को मोबाइल नेटवर्क पर फॉरवर्ड किया जा सकता है। एक सिम बॉक्स में 32 सिम लगाते थे। इससे अंतरराष्ट्रीय कॉल्स भी स्थानीय लगती है।
साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए साइबर सेल थाने की विशेष टीमें काम कर रही हैं। लोगों को खुद भी जागरूक होने की जरूरत है। इसके अलावा हमारी टीमें वह डोर टू डोर जाकर बुजुर्ग लोगों को जागरूक कर रहे हैं। खासतौर पर उन बुजुर्ग लोगों को जो अकेले रह रहे हैं। - पुष्पेंद्र कुमार, आईजी चंडीगढ़।