एक व्यक्ति ने पत्नी का गला घोंट और चाकू से गोद कर बेरहमी से हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद वह जहरीला पदार्थ निगलकर खुद थाने पहुंच गया। मामला पंजाब के बरनाला के गांव रूड़ेके कलां का है। बेहोश होने पर पुलिस ने उसे सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया। वहां से डाक्टरों ने उसे पटियाला रेफर कर दिया। मृतका का शव बरनाला के सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए लाया गया है। मामला ससुराल परिवार की जमीन हथियाने से जुड़ा बताया जा रहा है।
सिविल अस्पताल में विलाप कर रही मृतक की मां बलवीर कौर और पिता करनैल सिंह निवासी दुग्गां-संगरूर ने पुलिस को बताया कि बलविंदर कौर का विवाह गांव रूड़ेकेकलां निवासी सुरजीत सिंह के बेटे करमजीत सिंह से किया था। उन्होंने बताया कि उनके पास 30 एकड़ से ज्यादा जमीन है। अपनी दोनों बेटियों को जमीन का वारिस समझते हुए जमीन का विभाजन तीन हिस्सों में कर दिया था।
कुछ समय बीतते ही करमजीत सिंह ने बाकी जमीन हथियाने के लिए उनकी बेटी बलविंदर कौर को परेशान करना व मारना पीटना शुरू कर दिया था। पीड़ित मां ने बताया कि वह डेढ़ महीना पहले बेटी से मिलने रूड़ेके कलां आई थी। वहां करमजीत ने अधिक दबाव बनाने के लिए उससे भी मारपीट करने की कोशिश की थी।
पीड़ित परिजनों ने करमजीत सिंह के खिलाफ नशे का आदी होने, चरित्रहीन होने, आस-पड़ोस में रहने वाली बहू-बेटियों पर बुरी नजर रखने जैसे संगीन आरोप लगाए है। उन्होंने बिलखते हुए कहा कि यदि उन्हें इस बात का आभास होता कि करमजीत उनकी बेटी की हत्या ही कर देगा तो वह उसको समय रहते बचा लेते। इस संबंध में थाना रूड़ेके कलां के प्रभारी मनजीत सिंह ने कहा कि आरोपी करमजीत सिंह के खिलाफ हत्या की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बलविंदर कौर के शव का पोस्टममार्टम करवाया जा रहा है।
अदालत से की फांसी की मांग
पीड़ित मां बलवीर कौर, पिता करनैल सिंह ने अदालत से मांग की है कि बेटी के हत्यारे को ऐसी मौत दी जाए कि उसके खानदान की दस पुश्तों में किसी की बेटी को मारने की हिम्मत न हो सके। उन्होंने कहा जमीन दांव पर लगा देंगे लेकिन हत्यारे को फांसी के तख्ते तक पहुंचा कर लेंगे दम।
मृतक की बेटी शादी योग्य
पीड़िता बलवीर कौर ने बताया कि उसकी दोहती लवप्रीत कौर जिसकी उम्र 23 साल की है। उसकी शादी के लिए रिश्ते की तलाश की जा रही थी। क्योंकि उन्हें पता था कि करमजीत अपनी बेटी की शादी भी नहीं कर सकेगा, जिसकी जिम्मेदारी वह खुद ही पूरा कर रहे थे। दोहते की पढ़ाई का खर्च भी वह खुद ही उठा रहे हैं।