समझौता एक्सप्रेस जब पाकिस्तान वाघा रेलवे स्टेशन से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहुंचती है, तब भारतीय गेट में तैनात बीएसएफ के जवान गेट खोलते हैं। गेट खुलते ही समझौता एक्सप्रेस का इंजन भीतर प्रवेश करता है। इसके साथ ही वहां पहले से पहुंचे कस्टम अधिकारी इंजन और बोगियों में चढ़ जाते हैं। समझौता एक्सप्रेस का ड्राइवर गाड़ी को धीमी गति से आगे बढ़ाता है।
गाड़ी की सुरक्षा के लिए बीएसएफ के घुड़सवार बोगियों के साथ-साथ चलते हैं। घुड़सवार अटारी रेलवे स्टेशन से कुछ ही मीटर दूरी पर एक नाले तक जाते हैं। उसके बाद गाड़ी रेलवे स्टेशन पर पहुंचती है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब हेरोइन के बैग को फेंका गया था तो घुड़सवार टुकड़ी की नजर क्यों नहीं पड़ी। कस्टम व अन्य सुरक्षा एजेंसियां इस बैग को फेंकने वाले की पहचान नहीं कर सकी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बैग फेंकने वाला सफेद वर्दी में था। ऐसे में संभावना है कि वह पाकिस्तानी गार्ड हो सकता है।