चोरी की वारदात में अक्सर मकान मालिक की एक भूल कारण बनकर सामने आती है। लेकिन, ली-काबूजिए सेंटर और गवर्नमेंट कालेज आफ ऑर्ट्स से करोड़ों के धरोहर फर्नीचर की चोरी के पीछे कहीं जानबूझकर लापरवाही तो नहीं की गई है।
पुलिस की जांच दोबारा से धरोहर के करीबियों की ओर घूमने लगी है। करोड़ों के धरोहर की सुरक्षा व्यवस्था में कॉलेज प्रशासन और चंडीगढ़ प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई है।
सोमवार रात को सेक्टर-10 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज आफ आर्ट्स के स्टोर से 15 हेरिटेज कुर्सियां और एक टेबल चोरी कर लिए गए। इनकी कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है। कॉलेज प्रशासन की तरफ से चोरी की शिकायत पुलिस को दी गई है।
बुधवार को अमर उजाला टीम ने सेक्टर-10 स्थित आर्ट्स कॉलेज के फर्नीचर चोरी वाले स्थान का मुआयना कर संबंधित कर्मचारियों से जानकारी ली। इस दौरान धरोहर की सुरक्षा में घोर लापरवाही नजर आई।
धरोहर फर्नीचर की सुरक्षा में चौकीदार के अलावा दूसरी कोई व्यवस्था सामने नहीं आई। इसके अलावा चोरी एक तय योजना के तहत की गई लगती है। बड़ा सवाल है कि चौकीदार के चक्कर लगाने के बावजूद बड़ी आसानी से लॉक तोड़कर महंगा और भारी फर्नीचर कैसे चोरी हो सकता है?
वहीं, सोमवार की रात यानि वारदात के समय चौकीदार कृष्ण कुमार की ड्यूटी थी। उन्होंने बताया कि सोमवार की रात लगातार चक्कर लगा रहा था। पहले चक्कर और दूसरे चक्कर करीब 12बजे तक सब ठीक था। उसने बताया कि तीसरे चक्कर में उसने देखा कि फर्नीचर स्टोर का ताला टूटा था और अंदर से कुर्सियां चोरी हो चुकी थी। इसके बाद उसने तुरंत इसकी सूचना कॉलेज प्रशासन को दी।
तीन शिकायत के बाद भी लापरवाही:
सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले चौकीदार अजीत कुमार ने बताया कि फर्नीचर की सुरक्षा बढ़ाने के लिए उसने कॉलेज प्रशासन तीन बार कहा था। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था नहीं बढ़ाई गई। आखिरकार कॉलेज प्रशासन द्वारा इतनी लापरवाही क्यों बरती गई। क्या उनको धरोहर के महत्व की जानकारी नही थी?
धरोहर की सुरक्षा में लापरवाही:
पुलिस के अनुसार प्राथमिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था की कमी ही वारदात का कारण है। इसी वजह से पुलिस को कोई सुराग हाथ नहीं लग पा रहा है। टेक्नोलाजी के जमाने में आज एक शॉप पर भी दोनों ओर कैमरे लगे होते है। जबकि, धरोहर की निगरानी के लिए सीसीटीवी का उपयोग नहीं किया गया है।
18 विशेष कुर्सिंयों में 15 कुर्सियां चोरी
हेरिटेज फर्नीचर में से 15 कुर्सियां और एक टेबल चोरी गया है। सूत्रों के अनुसार सबसे पहले 18 कुर्सियां छांटकर रखवाई गई थीं। इनमें से 16 कुर्सियां बिल्कुल ठीक थीं। अच्छी कुर्सियों में से ही 15कुर्सियां चोरी हुई हैं। जबकि, दो खस्ताहाल सहित तीन कुर्सियां चोर छोड़ गए।
पुलिस निकाल रही डाटा
सेक्टर-3 थाना पुलिस ने जांच में कमर कस लिया है। सूत्रों की मानें तो प्रशासन के आला अधिकारियों ने उच्चस्तरीय और जल्द जांच करने का आदेश भी दिया है। इसके बाद मौजूद गार्ड व संदेह में आए कर्मचारियों का डंप डाटा निकाला जा रहा है। इसके साथ कॉलेज से निकलकर जाने वाली सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे का डंप डाटा लिया जा रहा है।
पिछली चोरी के सवालों का नहीं कोई जवाब?
इससे पहले साल 2015 में सेक्टर-19 स्थित ली कार्बूजिए सेंटर से चोर 8 कुर्सियां और दो टेबल चोरी गए थे। इसकी प्राथमिक शिकायत देने के बाद किसी को जानकारी तक नही दी गई। इसका खुलासा मोहन जोशी नामक गार्ड द्वारा लिखे सुसाइड नोट से हुआ था। लेकिन, आज तक चोरी की जांच और मोहन जोशी के सुसाइड मामले में पुलिस जानकारी नहीं जुटा पाई। धरोहर चोरी के बाद एडवाइजर विजय कुमार देव के आदेश पर पुलिस विभाग के आला अधिकारियों ने खुद जांच संभाली थी। ईस्ट एएसपी डा. गुरइकबाल सिंह सिद्धू ने भी जांच की।
प्रशासन भी लापरवाही में पीछे नही:
एडवोकेट अजय जग्गा ने साल 2011 में हेरिटेज फर्नीचर की इनवेटरी के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद आज तक इनवेटरी या ऑडिट नही हो पाया। ली कार्बूजिए और पियरे जेनेरे ने चंडीगढ़ के लिए करीब बारह हजार हेरिटेज फर्नीचर तैयार किए थे। लेकिन, आज तक यूटी प्रशासन के बाद इस संबंध में पूरी जानकारी नहीं है।
दूसरी ओर पिछले दस सालों से होने वाले हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी को यूटी प्रशासन रोक नहीं पाया। फ्रांस में इन हेरिटेज फर्नीचर का काफी डिमांड है। साल 2008 में एक आक्सन में फ्रांस के एरिक ने तीन करोड का फर्नीचर खरीदा था।