चंडीगढ़ और बद्दी के बीच मेट्रो जैसी एलिवेटेड ट्रेन दौड़ेगी। महंगी होती जमीन और पटरियों की मेंटीनेंस कॉस्ट से बचने के लिए रेलवे ने देश के कई प्रमुख नजदीकी शहरों के बीच इस तरह के ट्रैक हवा में बिछाने की मंजूरी दी है।
मंत्रालय ने इस बारे में अपने सभी जोन के जनरल मैनेजरों को आदेश जारी कर दिए हैं कि आगे से एलिवेटेड ट्रैक के निर्माण को तरजीह दी जाए।
रेलवे बोर्ड के मेंबर इंजीनियरिंग वीके गुप्ता ने बताया कि एलिवेटेड ट्रैक की इस योजना की शुरुआत चंडीगढ़ से बद्दी के बीच की जा रही है। मंत्रालय ने ट्रैक निर्माण को हरी झंडी दे दी है। इस साल 2500 किलोमीटर नए ट्रैक के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
अगले दो साल में यह लक्ष्य 35 सौ किलोमीटर होगा, जबकि साल 2020 में इस लक्ष्य को 17 हजार दो सौ किलोमीटर रखा गया है। ट्रैक बिछाने के लिए काफी जमीन की जरूरत पड़ेगी। लेकिन जमीन महंगी होने के साथ ही ट्रैक के रखरखाव पर काफी खर्च आता है।
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर मॉल और डिपार्टमेंट स्टोर
इसके अलावा शहर या आसपास की आबादी को भी काफी दिक्कतें आती हैं। इन दिक्कतों को दूर करने के लिए अब मेट्रो की तर्ज पर एलिवेटेड ट्रैक के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।
मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर बनेगा
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर खाली पड़ी जगह पर मॉल और डिपार्टमेंट स्टोर बनाने की योजना है। इन्हें पीपीपी मोड में बनाया जाएगा। चंडीगढ़ के अलावा दिल्ली के बिजवासन और आनंद विहार, सूरत, गांधीनगर, और हबीबगंज (भोपाल) स्टेशन पर भी ऐसे ही मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर बनेंगे।
सैटेलाइट टर्मिनल भी बनेंगे
मंत्रालय बड़े शहरों के मुसाफिरों को शहरी ट्रैफिक के झमेले से बचाने के लिए सैटेलाइट टर्मिनल भी शुरू करने जा रहा है। ये सैटेलाइट टर्मिनल दिल्ली, वाराणसी, लखनऊ, इलाहाबाद और जयपुर में स्थापित किए जाएंगे। इसमें शहर के एक तरफ स्थित रेलवे स्टेशन से ट्रेन चलाई जाएगी, जो शहर के बाकी सेटेलाइट टर्मिनलों से होते हुए अपने गंतव्य को जाएगी। यात्री अपनी सुविधा अनुसार किसी भी टर्मिनल से ट्रेन पकड़ सकेंगे।