रोहतक नगर निगम में हुए 19 लाख रुपये के फर्नीचर खरीद मामले में सरकार ने विजिलेंस जांच के आदेश दे दिए हैं। शिकायत के बाद शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन ने मामले में जांच की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जांच को मंजूरी दे दी। विजिलेंस को एक माह में मामले की पड़ताल कर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
मले में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर को नोटिस जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि उन्हें क्यों ना बर्खास्त कर दिया जाए। वहीं, एकाउंट ऑफिसर व एमई के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। घपला पार्षदों के कार्यालयों के लिए खरीदे गये 19 लाख 63 हजार के फर्नीचर में किया गया, जिसमें बाजार रेट से ज्यादा दाम पर सामान खरीदा गया था।
नगर निगम हाउस की बैठक में 19 फरवरी 2014 को एक प्रस्ताव पास किया गया। इसमें पार्षदों को अपने वार्ड में कार्यालय खोलने के लिए कहा गया था। कार्यालयों में फर्नीचर खरीदने के लिए एक कमेटी बनाई गई। इसमें मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, एकाउंट ऑफिसर व एमई को रखा गया था। उस समय तीन दुकानदारों से कुटेशन मंगवाई गई, जिनमें से एक फर्नीचर हाउस से सामान मंगवा लिया गया और 19 लाख 63 हजार रुपये का भुगतान किया गया। भुगतान अगस्त से दिसंबर 2014 तक अलग-अलग किस्तों में किया गया।
पार्षद अशोक खुराना, जयकिशन शर्मा, पूनम किलोई, अजय जैन, ममता रानी, सुशीला इंदौरा ने फर्नीचर खरीद में घोटाले का आरोप लगाते हुए तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर अनु श्योकंद को शिकायत दी। उस समय जांच में खानापूर्ति की गई और जांच ट्रेनी आईएएस विक्रम को दी गई। उनकी जांच में आरोप सही पाए गये। यह फाइल दिसंबर 2015 में शासन को भेज दी गई। इसी को संज्ञान लेते हुए सीएम खट्टर ने विजिलेंस जांच के आदेश दिये हैं, जिसमें मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी को नोटिस जारी किया गया है। उस समय निगम में एमई व एकाउंट ऑफिसर रहने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। मंत्री कविता जैन ने बताया कि विजिलेंस फर्नीचर खरीद मामले में गठित समिति के सभी सदस्यों मेयर, सीनीयर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर, वाणिज्य अधिकारी एवं निगम अभियंता की भूमिका की जांच करेगी।
इस तरह पकड़ा गया था घोटाला ट्रेनी आईएएस विक्रम ने बाजार से कई दुकानों से सामान के रेट मंगवाए। इसमें पता चला कि जिन कुर्सियों को 850 रुपये में खरीदा गया है, उनका बाजार में रेट 525-530 रुपये है। कोई भी चीज ब्रांडेड नहीं है। अन्य सामान भी ज्यादा दाम पर खरीदा गया है। एक कुटेशन फर्जी लगाई गई थी, जिसमें रेट ज्यादा दिखाए गए थे। आईएएस विक्रम की जांच रिपोर्ट पूरी होने पर शासन को फाइल भेजी गई थी। हालांकि जब मामले ने तूल पकड़ा तो दुकानदार ने एक लाख रुपये का चेक लौटा दिया था और उसे निगम में जमा कराया गया था। उससे भी शक बढ़ गया था।
जांच से नहीं डरती: मेयर मेयर रेनू डाबला का कहना है कि मैं जांच से नहीं डरती। लेकिन सरकार से एक ही अपील है कि वह जांच में राजनीतिक द्वेष की भावना ना रखे। जांच को निष्पक्ष कराया जाए, जिसमें साफ हो जाएगा कि इसके लिए कौन दोषी है? वहीं, जिन पार्षदों ने शिकायत की थी, वह एक साल तक फर्नीचर का इस्तेमाल करते रहे और भाजपा की सरकार आने के बाद हंगामा करने लगे।
मेयर को बर्खास्त किया जाए: अशोक खुराना फर्नीचर घोटाले के मामले में लगातार हंगामा करने वाले पार्षद अशोक खुराना कहते हैं कि सरकार पूरी तरह से जीरो टोलरेंस पर काम कर रही है। इसलिए सरकार ऐसे घोटाला करने वाले मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर को बर्खास्त जरूर करेगी, क्योंकि पहले ही अफसरों की जांच में घोटाला साबित हो चुका है।
जनता का पैसा हड़पने वालों पर हो कार्रवाई : विधायक
विधायक मनीष ग्रोवर का कहना है कि जनता का पैसा हड़पने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इसमें चाहे कोई मेयर हो या खुद मनीष ग्रोवर हो। जनता की खून पसीने की कमाई होती है और उसे उनके लिए ही खर्च किया जाना चाहिए। अपने आराम के लिए नहीं। सरकार की जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों पर कार्रवाई जरूर होगी।