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धोखाधड़ी: वर्क परमिट दिलाने का झांसा देकर 11 युवकों को फांसा

Fri, 08 Jul 2016 05:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली।
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फर्जी कॉल - फोटो : demo pic
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विदेश में वर्क परमिट का धंधा करने वाली शहर की ट्रैवल एजेंसी के खिलाफ 11 युवकों ने कनाडा भेजने के नाम पर करीब 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। इन युवकों ने आरोप लगाया कि कनाडा की एक कंपनी में वर्क परमिट दिलाने के नाम पर झांसा दिया गया। आरोप हैं कि कंपनी ने प्रति व्यक्ति एक से सवा लाख रुपये हड़प लिए। 
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शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, पुलिस ने युवकों के बयान दर्ज कर लिए हैं, लेकिन अभी तक आरोपी एजेंसी के संचालक और एजेंसी में कार्यरत मानव उर्फ मनु के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। गांव मामूपुर वासी हरदीप सिंह, मोहाली फेज-2 निवासी सुनील कुमार, मदनपुर निवासी शिवनाथ, मोहाली फेज-2 निवासी विंकल कुमार, संगरूर निवासी निर्मलजीत वर्मा, कमलदीप सिंह, गगनदीप सिंह, लुधियाना निवासी संदीप कौर सहित 11 लोगों ने पुलिस को शिकायत दी थी। युवकों की शिकायत के बाद डीएसपी ने मामले की जांच की थी।

शिकायतकर्ता सुनील कुमार ने बताया कि उन्होंने एजेंसी की मदद से कनाडा के वर्क परमिट के लिए अप्लाई किया था। एजेंसी ने उन्हें कनाडा के क्यूबिक सिटी स्थित फूड पैकिंग कंपनी सपाटू में काम दिलाने का वादा किया था। आरोप है कि पैसे लेने के बाद यह एजेंसी अपना दफ्तर खाली करके गायब हो गई। 
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सभी का कराया गया था मोहाली में मेडिकल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2016 के फरवरी और मार्च में ट्रैवल एजेंट ने कनाडा का वर्क परमिट दिलाने से पहले जरूरी कागजात लिए थे। इसके साथ ही प्रत्येक व्यक्ति से 22 हजार 780 रुपये लिए थे। उसके बाद मेडिकल कराने के लिए कहा गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनका मेडिकल इंडस अस्पताल मोहाली में कराया गया और इसके लिए 6200 रुपये वसूल किए गए। 
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मार्च और अप्रैल में ली गई थी पेमेंट

एमबीए की परीक्षा में हुआ फर्जीवाड़ा - फोटो : demo pic
शिकायतकर्ताओं के अनुसार मेडिकल कराने के एक सप्ताह बाद एजेंट ने सभी को बताया कि उनका एचआरएसडीसी आ गया है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को 84 हजार 600 रुपये जमा कराने होंगे। कनाडा का वर्क परमिट अप्लाई करने वाले युवाओं ने 31 मार्च 2016 और अप्रैल में अलग-अलग तारीख में 84 हजार 600 रुपये की राशि एजेंट मानव के पास जमा करवा दी थी।

एग्रीमेंट की दी गई फोटोस्टेट
एजेंट ने जो भी राशि वर्क परमिट दिलाने की प्रक्रिया के लिए ली थी, उसका एग्रीमेंट बनाया था। इसमें एजेंट ने उस राशि का ब्यौरा लिखा। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एजेंट ने किसी को भी इस एग्रीमेंट की मूल कापी नहीं दी। इसके स्थान पर उन्हें फोटो स्टेट कापी दी गई थी।

रुपये लेने के बाद दफ्तर कर गए खाली
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, रुपये लेने से पहले एजेंसी का पूरा स्टाफ दफ्तर में मिलता था, लेकिन रुपये लेने के बाद जब 18 अप्रैल 2016 को एजेंट के दफ्तर एससीएफ 121 फेज-7 में गए तो दफ्तर खाली था। पूरा स्टाफ गायब था। धोखाधड़ी का शिकार हुए सभी लोगों ने काफी हंगामा किया थे।
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