हत्याकांड को अंजाम देने में सोनिया के साथ शामिल रहा उसका पति संजीव भी कुरुक्षेत्र जेल में ही शिफ्ट किया गया था और वह भी जेल प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। करीब तीन माह पहले वह पेरोल पर जेल से बाहर गया था, जो आज तक वापस नहीं लौटा है। जेल अधीक्षक के मुताबिक उसे काबू करने के लिए दो टीमें लगातार छापेमारी कर रही है। हालांकि अभी वह हाथ नहीं आया है, लेकिन जल्द ही काबू कर लिया जाएगा।
सोनिया से संजीव भी पीड़ित : डॉ संजय
जेल अधीक्षक डॉ संजय सिंह का कहना है कि सोनिया जब से इस जेल में शिफ्ट की गई है तभी से ही हर समय सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करती रही है। वह भी दूसरी बंदियों के साथ मारपीट व दुर्रव्यहार करने लगती तो कभी कोई ऐसी घटना को अंजाम देने का प्रयास करती। यहां तक कि यहीं जेल में बंद उसका पति संजीव भी उससे पीड़ित हो चुका था और शायद यही कारण है वह पेरोल पर जाने के बाद वापस नहीं लौटा है। सोनिया को अब करनाल शिफ्ट कर दिया है। जेल में बंद सभी 30 महिला बंदी सोनिया से परेशान होकर उससे पीछा छुड़ाना चाहती थी। उसका हर जेल में यही व्यवहार रहा है।
आत्म हत्या के प्रयास में दर्ज किया गया मामला : नफे सिंह
सेक्टर सात चौकी इंचार्ज नफे सिंह ने बताया कि जेल उपाधीक्षक नफे सिंह की शिकायत पर सोनिया के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया गया है। इससे पहले भी उसके खिलाफ महिला बंदी के साथ मारपीट का मामला दर्ज किया गया था।
सोनिया व संजीव ने वर्ष 2001 में अपने ही 8 परिजनों की हत्या की थी। परिवार के बच्चों को भी उन्होंने बेहद निदर्यता से पटक-पटक कर मार डाला था। अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सजा बरकरार रही। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति से फांसी की सजा टालने की अपील की थी तो राष्ट्रपति ने फांसी की सजा को उम्र कैद में बदल दिया था। इसके बाद वह प्रदेश की कई जेलों में रह चुके है।
ये था पूरा घटनाक्रम
सोनिया और संजीव ने 23 अगस्त, 2001 अपने परिवार के सदस्यों को निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया था। इस प्रकरण में पति पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जिला अदालत ने 31 मई, 2004 को दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके पश्चात 12 अप्रैल, 2005 को हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था,जबकि 15 फरवरी, 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी।
23 अगस्त, 2008 को सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पटीशन खारिज कर दी थी। 1 सितंबर, 2007 को फांसी की तारीख तय करने के लिए जिला अदालत में याचिका दायर की गई थी। वहीं 8 सितंबर, 2007 को जिला अदालत ने 26 नवंबर 2007 को फांसी देने की तारीख तय की थी, लेकिन नवंबर, 2007 में संजीव के परिजनों ने राष्ट्रपति से अपील की थी जिसे राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया था।