पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह की बम ब्लास्ट से हत्या मामले में अंतिम आरोपी आतंकी जगतार सिंह तारा के खिलाफ 25 मार्च से केस का ट्रायल शुरू होगा।
वीरवार को बुड़ैल जेल में विशेष कोर्ट लगाई गई। तारा के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 268 लगी होने के कारण उसे बुड़ैल जेल से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। इसलिए केस का पूरा ट्रायल बुड़ैल जेल में ही चलेगा। जेल में लगाई गई विशेष कोर्ट में आतंकी तारा ने केस की पैरवी के लिए वकील करने से इंकार कर दिया है।
इसके बाद न्यायाधीश ने उसे केस का ट्रायल शुरू किए जाने की बात कही। अब कोर्ट की ओर से तारा को केस की पैरवी के लिए लीगल एड के जरिए वकील मुहैया कराया जाएगा। 25 मार्च से केस में गवाहियां शुरू हो जाएंगी। वहीं केस से जुड़ा सारा रिकार्ड सुप्रीम कोर्ट से आ चुका है।
केस का ट्रायल शुरू करने के लिए अदालत दिल्ली सीबीआई को समन कर सकती है। सीबीआई को केस में लगभग 18 गवाहों के बयान कराने हैं। शेष की गवाहियां पहले ही हो चुकी हैं। बता दें कि तारा ने मामले की पिछली सुनवाई पर विशेष कोर्ट को एक पत्र सौंपा था इसमें उसने कहा था कि वह केस की पैरवी नहीं कराना चाहता है। उसे भारतीय न्यायिक प्रणाली पर भरोसा नहीं है। उसे सजा देनी है वह दे सकते हैं और वह इसके लिए तैयार है।
ट्रायल के दौरान हुआ था फरार
बेअंत सिंह हत्याकांड के ट्रायल के दौरान ही तारा बुड़ैल जेल ब्रेक कर फरार हो गया था। पूर्व सीएम हत्याकांड में जुलाई 2007 को फैसला आया था, जबकि तारा 2004 में फरार हो गया था। तारा को पिछले साल जनवरी में ही थाइलैंड में गिरफ्तार किया गया था।
1995 में किया था ब्लास्ट
31 अगस्त, 1995 को बेअंत सिंह की पंजाब सिविल सचिवालय भवन के पास बम ब्लास्ट में हत्या कर दी गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। केएलएफ के दिलवार सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था। मामले में बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य जगतार सिंह हवारा, परमजीत सिंह भ्यौरा, जगतार सिंह तारा को गिरफ्तार किया था।
तीनों बुड़ैल जेल में बंद थे। जेल से फरार होने के बाद देवी सिंह को छोड़ तीनों कैदियों को पुलिस पकड़ चुकी है। वहीं जेल ब्रेक में लापरवाही बरतने वाले जेल कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ सेक्टर-34 पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था।
7 को हो चुकी है सजा
पंजाब के सीएम बेअंत सिंह की हत्या मामले में 27 जुलाई 2007 को कुल 9 में से 7 दोषियों को सजा सुनाई गई थी। इनमें जगतार सिंह हवारा और परमजीत सिंह भ्यौरा को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके अलावा सजा पाने वालों में शमशेर सिंह, लखविंदर सिंह, नसीब सिंह, बलवंत सिंह और गुरमीत सिंह शामिल थे।
इन्हें हत्या, हत्या के प्रयास, आत्महत्या के लिए उकसाना, आपराधिक साजिश रचने और एक्सप्लोसिव एक्ट की धारा 4, 5 व 6 के तहत दोषी पाया गया था। वहीं नसीब सिंह को एक्सप्लोजिव एक्ट की धारा-5 में दोषी ठहराया था। केस में नवजोत सिंह को बरी कर दिया गया था।