फायरमैन भर्ती घोटाले की जांच एक बार फिर अटक गई है। पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। सीएफएसएल से आई फायरमैन कर्मियों की सील बंद रिपोर्ट को पुलिस ने करीब 20 दिन बाद जाकर खोला।
सूत्रों के अनुसार, इस भर्ती में कई पुलिसकर्मियों के रिश्तेदार और परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। ऐसे में यदि जांच गहराई से की गई तो कई पुलिसकर्मी भी फंस सकते हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या इसी कारण पुलिस जांच को ठंडे बस्ते में डाल रही है? सेक्टर-36 थाना प्रभारी जे.पी. सिंह पिछले 20 दिन से लगातार कह रहे हैं कि उन्हें रिपोर्ट खोलकर देखने का समय नहीं मिला। वहीं वरिष्ठ अधिकारी भी इस मामले में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे।
मामले की जांच कर रहे एक अधिकारी के अनुसार कुल 248 फायरकर्मियों को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। इनमें से 241 कर्मी अदालत में नमूने देने पहुंचे, जबकि 7 नहीं आए। अब पुलिस फिंगरप्रिंट जांच के लिए ये नमूने दिल्ली या फिल्लौर भेजेगी, जबकि हैंडराइटिंग सैंपल सेक्टर-36 सीएफएसएल को भेजे जाएंगे। जिसमें असली और डमी उम्मीदवारों का खुलासा होगा।
वर्ष 2023 में एएसआई भर्ती परीक्षा के दौरान चार फर्जी उम्मीदवार पकड़े गए थे। सोनीपत निवासी सतीश को असली उम्मीदवार की जगह परीक्षा देते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सतीश ने कबूल किया कि उसने सोमवीर नामक व्यक्ति के साथ मिलकर दमकल विभाग में 10-10 लाख रुपये लेकर फर्जी भर्तियां करवाईं। सतीश की निशानदेही पर पुलिस ने दीपक, बृजेंद्र और नवीन को गिरफ्तार किया, जो डेढ़ साल से फायरमैन के पद पर कार्यरत थे।
अमर उजाला ने इस मामले में लगातार खबरें प्रकाशित की थीं, जिसके बाद आईजी पुष्पेंद्र कुमार ने जांच के आदेश दिए थे। लेकिन अब फिर से जांच अटक गई है। अभी पुलिस ने फायरमैन कर्मियों का रिकॉर्ड सीएफएसएल नहीं भेजा। न ही 7 कर्मियों को नोटिस जारी किए, जिन्होंने नमूने नहीं दिए। वहीं आईजी ने कहा कि जांच अधिकारी को तेजी से जांच करने के आदेश दिए। आईजी ने इस संबंध में अधिकारियों से रिपोर्ट मांग ली है।
इस मामले के जांच अधिकारी यशपाल कुंडू थे। उन्होंने उन आरोपियों की पहचान कर ली थी, जिन्होंने फायरमैन कर्मियों की जगह परीक्षा दी थी।