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फायरमैन भर्ती घोटाले की जांच फिर अटकी: CFSL रिपोर्ट का खुलासा करने से कतरा रही पुलिस, सात नहीं आए सैंपल देने

Wed, 29 Oct 2025 11:33 AM IST
निवेदिता वर्मा संदीप खत्री, संवाद, चंडीगढ़

सार

एक अधिकारी के अनुसार कुल 248 फायरकर्मियों को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। इनमें से 241 कर्मी अदालत में नमूने देने पहुंचे, जबकि 7 नहीं आए।
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चंडीगढ़ पुलिस - फोटो : संवाद
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विस्तार
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फायरमैन भर्ती घोटाले की जांच एक बार फिर अटक गई है। पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। सीएफएसएल से आई फायरमैन कर्मियों की सील बंद रिपोर्ट को पुलिस ने करीब 20 दिन बाद जाकर खोला। 

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अब रिपोर्ट देखने के बाद भी पुलिस इसका खुलासे से कतरा रही है। सूत्रों के अनुसार दीपक और बृजेंद्र की लगभग 43 बिंदुओं पर सीएफएसएल जांच रिपोर्ट तैयार की गई। सूत्रों ने रिपोर्ट में गड़बड़ियों की आशंका जताई है।

वहीं, एक महीने बाद भी सात फायरमैन कर्मी अदालत में नमूने देने नहीं पहुंचे। पुलिस का कहना है कि बचे हुए कर्मचारियों को जल्द नोटिस भेजा जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार हो चुके दो फायरमैन कर्मी दीपक और बृजेंद्र की रिपोर्ट आ चुकी है। हालांकि परीक्षा देने वाले असली आरोपी अब तक गिरफ्त से बाहर हैं।

पुलिसकर्मियों के बच्चे और रिश्तेदार भी भर्ती में शामिल

सूत्रों के अनुसार, इस भर्ती में कई पुलिसकर्मियों के रिश्तेदार और परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। ऐसे में यदि जांच गहराई से की गई तो कई पुलिसकर्मी भी फंस सकते हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या इसी कारण पुलिस जांच को ठंडे बस्ते में डाल रही है? सेक्टर-36 थाना प्रभारी जे.पी. सिंह पिछले 20 दिन से लगातार कह रहे हैं कि उन्हें रिपोर्ट खोलकर देखने का समय नहीं मिला। वहीं वरिष्ठ अधिकारी भी इस मामले में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे।

241 फायरमैन कर्मियों के नमूने भेजे जाएंगे सीएफएसएल

मामले की जांच कर रहे एक अधिकारी के अनुसार कुल 248 फायरकर्मियों को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। इनमें से 241 कर्मी अदालत में नमूने देने पहुंचे, जबकि 7 नहीं आए। अब पुलिस फिंगरप्रिंट जांच के लिए ये नमूने दिल्ली या फिल्लौर भेजेगी, जबकि हैंडराइटिंग सैंपल सेक्टर-36 सीएफएसएल को भेजे जाएंगे। जिसमें असली और डमी उम्मीदवारों का खुलासा होगा।

10-10 लाख रुपये लेकर हुई फर्जी भर्तियां

वर्ष 2023 में एएसआई भर्ती परीक्षा के दौरान चार फर्जी उम्मीदवार पकड़े गए थे। सोनीपत निवासी सतीश को असली उम्मीदवार की जगह परीक्षा देते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सतीश ने कबूल किया कि उसने सोमवीर नामक व्यक्ति के साथ मिलकर दमकल विभाग में 10-10 लाख रुपये लेकर फर्जी भर्तियां करवाईं। सतीश की निशानदेही पर पुलिस ने दीपक, बृजेंद्र और नवीन को गिरफ्तार किया, जो डेढ़ साल से फायरमैन के पद पर कार्यरत थे।

आईजी ने दिए थे जांच के आदेश

अमर उजाला ने इस मामले में लगातार खबरें प्रकाशित की थीं, जिसके बाद आईजी पुष्पेंद्र कुमार ने जांच के आदेश दिए थे। लेकिन अब फिर से जांच अटक गई है। अभी पुलिस ने फायरमैन कर्मियों का रिकॉर्ड सीएफएसएल नहीं भेजा। न ही 7 कर्मियों को नोटिस जारी किए, जिन्होंने नमूने नहीं दिए। वहीं आईजी ने कहा कि जांच अधिकारी को तेजी से जांच करने के आदेश दिए। आईजी ने इस संबंध में अधिकारियों से रिपोर्ट मांग ली है।

परीक्षा देने वालों तक पहुंचे जांच अधिकारी को बदला

इस मामले के जांच अधिकारी यशपाल कुंडू थे। उन्होंने उन आरोपियों की पहचान कर ली थी, जिन्होंने फायरमैन कर्मियों की जगह परीक्षा दी थी।

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यशपाल गिरफ्तारी के लिए टीम के साथ हरियाणा में छापेमारी कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान उनका तबादला कर दिया गया और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सूत्रों के अनुसार तीनों गिरफ्तार आरोपियों की जगह महेंद्रगढ़ के पास के एक गांव निवासी, हरियाणा की एक यूनिवर्सिटी में कार्यरत शिक्षक और दिल्ली में सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति परीक्षा देने आया था। पुलिस ने परीक्षा देने वालों के नाम चालान में भी लिखे थे, लेकिन गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई। सूत्रों का कहना है कि सोमवीर और सतीश के साथ पूरा गिरोह सक्रिय था। चंडीगढ़ पुलिस का एक मुलाजिम भी इस गिरोह से जुड़ा हुआ था।

आरोपी परीक्षा केंद्रों पर डमी उम्मीदवारों को गाड़ियों में भरकर लाते और परीक्षा खत्म होने के बाद वापस ले जाते थे। यशपाल उस समय केंद्रों, लाइट प्वाइंट और चौराहों पर लगे कैमरों की फुटेज खंगाल रहे थे।
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सीएफएसएल रिपोर्ट आ चुकी है। रिपोर्ट का विश्लेषण किया जा चुका है। मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है। -कंवरदीप कौर, एसएसपी

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