नीतिश घई काफी शातिर था। लोगों के करोड़ों रुपये ऐंठने के बाद उसने पुलिस से भी अच्छी सेटिंग की हुई थी। अगर ठगी का शिकार हुआ कोई भी व्यक्ति पुलिस में शिकायत करता तो वह पुलिस को रिश्वत देकर कार्रवाई नहीं होने देता था। जिस कारण उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में 300 के करीब शिकायतें पेंडिंग थीं। एडीसीपी स्पेशल ब्रांच सुरिंदर लांबा ने 25 मई को नीतिश घई के समराला चौक स्थित ऑफिस में रेड की।
इसके अलग दिन पुलिस को 25 शिकायतें उसके खिलाफ आई। जिसके बाद एडीसीपी लांबा ने घई की पुरानी सारी शिकायतों का ब्यौरा मांगा। फिर एक के बाद एक सभी शिकायतों पर कार्रवाई हुई और नीतिश के खिलाफ एफआईआर सिलसिला शुरू हुआ। आरोपी ने लुधियाना में बलेसिंग कंसल्टेंसी, समराला चौक, वी वीजा, मॉडल टाऊन, जीजीआई ग्रुप, गिल रोड़, 99-विजा, मदहोक कांप्लेक्स व ब्राइट सेल्यूशन, घुमारमंडी के नाम से दफ्तर खोल रखा था। इसके अलावा आरोपी के ऑफिस अमृतसर, जालंधर, नकोदर, फगवाड़ा, यूपी और दिल्ली में भी है।
नीतिश ने यह ठगी की दुकान 2015 में शुरू की थी। पहले उसका सिर्फ एक ही ऑफिस था। फिर ज्यों-ज्यों ठगी का कारोबार बढ़ता गया उसने कई ऑफिस खोल लिए। पुलिस इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि तीन वर्षों में आरोपी नीतिश घई ने 20 करोड़ के करीब की प्रापर्टी बना ली। जिसमें से कई उसके नाम, कई उसके भाई और पिता के नाम पर है। आरोपी नीतिश घई लग्जरी कारों का भी शौकीन है। पता चला है कि उसने थाईलैंड में भी एक होटल लीज पर लिया हुआ है।
इमिग्रेशन ऑफिस के साथ खाली हुई थी कई फर्जी लैब
ठग नीतिश घई ने इमिग्रेशन ऑफिस के साथ-साथ कई फर्जी मेडिकल लैब भी खोली हुई थी। जिसमें चौधरी डॉयग्नोस्टिक लैब, फास्ट डॉयग्नोस्टिक सेंटर, दिल्ली डॉयग्नोस्टिक सेंटर शामिल है। विदेश जाने वाले लोगों से मेडिकल के नाम से भी पैसे लिए जाते थे और इन फर्जी लैब में उनके लोगों के यूरिन और ब्लड सैंपल लिए जाते थे।