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चंडीगढ़ निगम में एफडी घोटाला: निगम कमिश्नर को नोटिस, सीबीआई ने तीन अधिकारियों के हस्ताक्षर नमूने भी मांगे

Fri, 15 May 2026 11:20 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सीबीआई ने अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति और पोस्टिंग से जुड़े दस्तावेजों के अलावा बैंक खातों के संचालन संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है।
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चंडीगढ़ नगर निगम - फोटो : फाइल
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विस्तार
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चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े करोड़ों रुपये के एफडी घोटाला मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने नगर निगम कमिश्नर को नोटिस जारी कर मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड तलब किए हैं। 
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इसके साथ ही पूर्व ज्वाइंट कमिश्नर गुरिंदर सिंह सोढी, चीफ फाइनेंस आफिसर नलिनी मलिक और अनुपम मिश्रा के हस्ताक्षर व हैंडराइटिंग सैंपल भी मांगे गए हैं।

सीबीआई ने अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति और पोस्टिंग से जुड़े दस्तावेजों के अलावा बैंक खातों के संचालन संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। जांच एजेंसी ने विभिन्न बैंकों को खाते बंद करने के लिए भेजे गए पत्र, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से संबंधित दस्तावेज, चेकबुक, इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस, ओटीपी लिंक डिवाइस और आधिकारिक ईमेल आईडी का ब्योरा भी तलब किया है।

सीबीआई ने निर्देश दिए हैं कि सभी दस्तावेज निर्धारित समय के भीतर सेक्टर-30 के एंटी करप्शन ब्रांच कार्यालय में जमा करवाए जाएं। आदेशों की अनदेखी करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 210 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच में निचले स्तर के कर्मचारियों की भूमिका सामने आई थी लेकिन अब जांच का दायरा वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक खातों और एफडीआर संचालन में किस स्तर तक अनियमितताएं हुईं और किन अधिकारियों की भूमिका रही।
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सीबीआई ने 11 मई को दर्ज किया था केस

सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने 11 मई 2026 को इस मामले में केस दर्ज किया था। जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत की जा रही है। आरोप है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खोले गए खातों, एफडीआर और फंड ट्रांसफर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।

नगर निगम कमिश्नर से 20 बिंदुओं पर रिकॉर्ड मांगा

नगर निगम कमिश्नर से 20 बिंदुओं पर रिकॉर्ड मांगा गया है। इनमें स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम की गवर्निंग बॉडी से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों की मंजूरी, एफडीआर रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, ऑडिट रिपोर्ट, फंड ट्रांसफर आदेश और ईमेल संवाद शामिल हैं। सीबीआई ने विशेष तौर पर करीब 108.73 करोड़ रुपये की 11 एफडीआर का पूरा ब्यौरा भी तलब किया है।

दो पूर्व बैंक कर्मचारी हो चुके हैं गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चंडीगढ़ जोनल कार्यालय ने हरियाणा सरकार, यूटी प्रशासन और निजी स्कूलों के खातों से करोड़ों रुपये के गबन मामले में हाल ही में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के दो पूर्व कर्मचारियों रिभव ऋषि और अभय कुमार को गिरफ्तार किया है। दोनों पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई की गई।

ईडी जांच में अब तक करीब 645 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के अनुसार सरकारी विभागों और निजी संस्थानों के खातों से रकम निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर की गई। आरोप है कि रिभव ऋषि ने अपने निजी सहायक और ड्राइवर के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाई थीं, जबकि अभय कुमार ने पत्नी और साले के नाम पर कंपनी खड़ी कर रकम ट्रांसफर करवाई। ईडी अब मनी ट्रेल और अन्य शामिल लोगों की भूमिका की जांच में जुटी है।
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