सीबीआई चंडीगढ़ की टीम ने खाद्य निगम के मैनेजर क्वालिटी कंट्रोल, टीए और चपरासी को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
मामला जीटी रोड स्थित हरियाणा एग्रो के गोदाम में पैडी शैलिंग चावलों की गाड़ियां लगाने की एवज में रिश्वत मांगने का बताया गया है। शुक्रवार शाम से देर रात तक चली इस छापेमारी में धरे गए एफसीआई के अधिकारी और कर्मचारियों ने एक शैलर मालिक से रिश्वत की डिमांड की थी।
शैलर मालिक ने इस मामले में सीबीआई को शिकायत दी थी, जिसके आधार पर उपरोक्त धरपकड़ हुई। पुलिस प्रक्रिया के दौरान सीबीआई के सुरक्षा कर्मियों ने किसी भी व्यक्ति को कमरे के भीतर नहीं जाने दिया।
बताया गया है कि श्रीगणेश राइस मिल के मालिक नछत्तर सिंह ने चावल की तीन गाड़ियां 10, 11 और 12 नवंबर को हरियाणा एग्रो के गोदामों में लगवाने के लिए भेजी थी, लेकिन एफसीआई के मौजूदा अधिकारियों ने इन गाड़ियों को लगाने की एवज में 50 हजार रुपये की डिमांड की थी।
राइस शैलर एसोसिएशन ईस्माईलाबाद के प्रधान पुनीत मित्तल एवं शिकायतकर्त्ता नछत्तर सिंह ने बताया कि जब बार-बार गुहार लगाने पर भी मानकों पर खरी उतरने के बावजूद उनकी चावल की गाड़ियों को नहीं उतरवाया गया तो उन्होंने नेट पर सीबीआई के अधिकारियों के संपर्क सूत्रों को खोजा था।
उन्होंने बताया कि खोजबीन में उनका संपर्क इंस्पेक्टर दिनेश से संभव हो सका, जिसके बाद उन्होंने अपनी सारी व्यथा सुनाई। पूरी योजना के अनुसार नछत्तर सिंह ने एफसीआई के चपरासी भरतूराम को 40 हजार रुपये बतौर रिश्वत दिए और सीबीआई की टीम ने उसे रंगे हाथों काबू किया। रिश्वत लेने के आरोप में मैनेजर क्वालिटी कंट्रोल सरोज कुमार, टेक्निकल असिस्टेंट-2 सचिन झा और चपरासी भरतू राम को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस कार्रवाई के बाद इंस्पेक्टर दिनेश ने रिश्वत लेने की बात की पुष्टि की है। वहीं, थाना प्रभारी मनोज कुमार भी पुलिस पार्टी के साथ मौके पर पहुंचे उन्होंने बताया कि सीबीआई की रेड में एफसीआई के तीन स्टाफ मेंबरों को रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
रिश्वत के तय हैं रेट : प्रधान
राइस मिलर एसोसिएशन शाहाबाद के प्रधान यशपाल वधवा, इस्माईलाबाद के प्रधान पुनीत मित्तल, सूर्या राइस मिल ठोल के बलबीर सिंह, सूबे सिंह ने आरोप लगाया कि एफसीआई में 544 कट्टों की गाड़ी में लगभग 75 सौ रुपये रिश्वत देनी पड़ती है। इसमें टीए के तीन हजार, कांटा करने वाले के 1750 रुपये, हरियाणा एग्रो के 350 रुपये, लेबर ठेकेदार के तीन हजार रुपये व सैंपल की थैली ले जाने वाले चपरासी के 50 रुपये रिश्वत के तौर पर दिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि लगभग 7 हजार गाड़ियां प्रतिवर्ष शाहाबाद के क्षेत्र में चावलों की लगाई जाती हैं। यदि केवल ठेकेदार के यहां ही इनकम टैक्स व अन्य विभागों की छापामारी हो तो करोड़ों रुपयों की नाजायज आय का पर्दाफाश होगा।