कर्ज से परेशान एक किसान ने अपने घर में ही छत के पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है।
भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां ने इस घटना के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए मृतक किसान के परिवार को मुआवजा देने, कर्ज माफ करने व एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। गांव चट्ठा ननहेडा के किसान सुखदेव सिंह ने घर में पंखे से फंदा लगाकर अपनी जान दे दी।
परिजनों को इस संबंधी उस समय पता चला जब सुखदेव का पोता सुबह की चाय देने उनके कमरे में गया। दादा को पंखे से लटकता देख उसने शोर मचाया और परिजनों ने सुखदेव सिंह को नीचे उतारा। तब तक किसान की मौत हो चुकी थी। सुखदेव के भाई गोबिंद सिंह और उनके बेटे होशियार सिंह ने कहा कि कर्ज की वजह से वे लंबे समय से परेशान थे। इसी कारण उन्होंने यह कदम उठाया है।
मामले के जांच अधिकारी एएसआई करम सिंह ने कहा कि यहां के सरकारी अस्पताल में किसान सुखदेव सिंह की लाश का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों के हवाले कर दी है। पुलिस ने धारा 174 के तहत कार्रवाई की है।
दूसरी तरफ, भाकियू के जिला सचिव दरबारा सिंह छाजला, सुखपाल सिंह, अजैब सिंह, भोला सिंह, राम सिंह ने कहा कि सुखदेव सिंह की मौत की असली जिम्मेदार सरकारी नीतियां हैं।
यूनियन ने मांग की है कि किसानों के सिर चढ़े कर्ज को माफ किया जाएं। किसानों ने मांग की कि सुखदेव सिंह का कर्ज माफ करके पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाए और परिवार को सरकारी नौकरी दी जाए।