पुलिस अधिकारियों ने तर्क दिया कि जनरैल दास ने खुद को बेकसूर साबित करवाने के लिए तत्कालीन डीआईजी फरीदकोट सुरजीत सिंह को एक करोड़ की रिश्वत दी थी। अब उसे फिर से केस में नामजद करने के लिए शिकायतकर्ता उन्हें पैसे दे। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने बाबा गगन दास से 35 लाख रुपये सौदा कर लिया, जिसमें से 20 लाख की वसूली भी कर ली और तीनों पुलिस अधिकारियों के रिश्वत वसूलने के काम में गोशाला सिखांवाला के प्रमुख बाबा मलकीत दास व फरीदकोट के जसविंदर सिंह जस्सी ठेकेदार ने भी साथ दिया।
रिश्वत देने के बाद भी नहीं हुआ काम
रिश्वत देने के बाद भी जब गगन दास को न्याय न मिला तो उसने डीजीपी पंजाब को शिकायत कर दी। डीजीपी ने डीआईजी फिरोजपुर रेंज की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर पूरे मामले की जांच करवाई, जिसमें आरोपों की पुष्टि होने के बाद 2 जून को थाना सदर कोटकपूरा में रिश्वत वसूलने के आरोप में एसपी गगनेश कुमार, डीएसपी सुशील कुमार, एसआई खेमचंद पराशर समेत बाकी दोनों सहयोगियों को नामजद किया और डीजीपी की हिदायत पर केस की जांच विजिलेंस को सौंप दी। मालूम हो इन पांचों आरोपियों की जिला अदालत से अग्रिम जमानतें भी रद्द हो चुकी हैं, जबकि दो आरोपियों खेमचंद पराशर व मलकीत दास की जमानत याचिकाएं उच्च न्यायालय भी रद्द कर चुका है।