सेक्टर-15 के एक घर में क्लीनिक चलाकर एमबीबीएस डाक्टर द्वारा मरीजों को गुमराह किया जाता था।
दावा था कि अगर कोई मर्द कमजोर है तो उसकी मर्दानगी लौटाई जाएगी। साथ ही बेटा पैदा होने की गारंटी भी दी जाती थी।
वह भी सिर्फ 3600 रुपये के साप्ताहिक कोर्स में। अगर गर्भ में बेटा नहीं होने की खबर लगती थी तो गर्भपात भी कर दिया जाता था।
ड्रग कंट्रोल विभाग को इसकी भनक लग गई और मंगलवार को विभागीय अधिकारियों ने ग्राहक बनकर इस क्लीनिक में रेड की और क्लीनिक पर ताला जड़ दिया।
आरोपी के खिलाफ सेक्टर-14 थाने में मामला दर्ज करने के लिए शिकायत दी गई है।
ऐसे खुला राज
सेक्टर-15 के एक घर में डॉ. बीसी गर्ग का क्लीनिक चलता था। ड्रग कंट्रोल विभाग को इस क्लीनिक में गड़बड़झाला की शिकायत मिली।
इसके बाद विभाग के असिस्टेंट स्टेट ड्रग कंट्रोलर नरेंद्र आहूजा, ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर सारिका मलिक और डिप्टी सिविल सर्जन डा. सविता एक परिवार बनकर क्लीनिक मेें पहुंचे और डॉ. बीसी गर्ग से बातचीत शुरू हुई।
इसी दौरान डा. गर्ग ने इस टीम को बताया कि ऐसी दवा दी जाती है, जिससे बेटा पैदा होने की गारंटी है। इसके अलावा अगर कोई मर्द कमजोर हो तो उस कमी को भी दूर किया जा सकता है। इस कोर्स की फीस साप्ताहिक 3600 रुपये है।
गर्भपात का सामान भी मिला
इसी बीच टीम की तरफ से सवाल उठाया गया कि अगर बेटा पैदा न हो तो? इस पर डॉ. बीसी गर्ग ने जवाब दिया कि महिला के गर्भवती होने के बाद अल्ट्रासाउंड से चेक कराया जाता है और अगर गर्भ में बेटा न हो तो गर्भपात कर दिया जाता है।
इतनी बातें खुलकर सामने आने के बाद टीम ने पैसे दिए और दवा ली। इसके तुरंत बाद अधिकारियों ने अपना परिचय दिया और पुलिस को भी मौके पर बुलाया। इसके अलावा क्लीनिक में सर्च अभियान चला तो गर्भपात करने का भी सामान मिला।
इन धाराओं के तहत दी शिकायत
नरेंद्र आहूजा के मुताबिक सेक्टर-14 के थाने में पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट की धारा 3ए, 22(1), 22(2) व एमटीपी एक्ट की धारा 3, 4, 5 व आईपीसी की धारा 312 व 313 के तहत डॉ. बीसी गर्ग के खिलाफ मामला दर्ज करने की शिकायत दी गई है।