चंडीगढ़ में डिजिटल अरेस्ट के मामले बढ़ गए हैं। कारण है कि लोग साइबर अपराधियों के प्रति जागरूक नहीं हैं। ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की है। अब तक ठगी के 10 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 99 प्रतिशत मामलों में पीड़ित की आयु 60 से 83 साल पाई गई।
2024 में चंडीगढ़ में डिजिटल अरेस्ट की पहली एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसमें सेक्टर 11 निवासी पीजीआई की 71 साल की महिला डॉक्टर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 72 लाख रुपये की ठगी की थी। पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के एक मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।
रिटायर्ड आर्मी अफसर की 81 साल की पत्नी से 95 लाख ठगे
हाल ही में सेक्टर-47 निवासी 90 साल के रिटायर्ड आर्मी अफसर की पत्नी से ठगों ने 95 लाख रुपये ठग लिए। 9 फरवरी को बुजुर्ग को एक कॉल आई। आरोपी ने कहा आपके पति का आधार कार्ड मनी लॉन्डि्रंग से जुड़ा हुआ है। आरोपियों ने महिला को सीबीआई और आरबीआई डायरेक्टर बनकर 95 लाख रुपये ठग लिए। ठगी की कॉल जब आई तो महिला के पति ने इशारों में कहा भी कि वह किसी भी ऐसे मामले से नहीं जुडे़ हैं। ठगों ने इतना डरा दिया कि महिला कुछ भी समझ नहीं पाई। महिला ने रिटायरमेंट खाते में यह रकम जमा की हुई थी।
महिला को 19 दिन डिजिटल अरेस्ट कर रखा
डड्डूमाजरा निवासी 56 साल की महिला को ठगों ने 19 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर रखा और उससे 51 लाख रुपये ठग लिए। वहीं, सेक्टर- 37 निवासी 64 साल की महिला को 27 घंटे डिजिटल अरेस्ट कर 15 लाख रुपये ठग लिए।
दो रिटायर्ड अफसरों से 1.5 करोड़ की ठगी
सेक्टर 35 निवासी 74 रिटायर्ड अफसर को डिजिटल अरेस्ट कर 45 लाख रुपये की ठगी की गई। पीड़ित मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते थे। सिर्फ बात करने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करते थे। वहीं ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर सेक्टर 49 निवासी पंजाबी की 72 साल की रिटायर्ड महिला अफसर से 60 लाख रुपये की ठगी कर ली। साइबर सेल के अधिकारी ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के लिए अगर कभी कॉल आए तो परिजनों को जानकारी देने के साथ-साथ संबंधित पुलिस थाने में इसकी जानकारी दें या फिर कॉल करने वाले की पास के बीट बॉक्स में जाकर पुलिसकर्मी से बात करवाएं।
एक व्यक्ति से 1.10 करोड़ ठगे
साइबर ठगों ने सेक्टर-36 निवासी 84 व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट कर 1.10 करोड़ रुपये ठग लिए। वह ज्यादातर सिर्फ बात करने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करते थे। इसके चलते वह साइबर ठगों की कॉल आते ही घबरा गए और ठगी का शिकार हो गए।
जान लीजिए... कैसे बच सकते हैं
साइबर सेल के अधिकारी ने बताया कि कभी भी पुलिस, ईडी सीबीआई, आरबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी किसी केस के लिए किसी की वीडियो कॉल नहीं करती। न ही व्हाट्सएप कॉल करती है। कोई भी एजेंसी यह भी नहीं बोलेगी कि इस कार्रवाई को लेकर किसी को नहीं बताना। अगर कोई इस तरह से कॉल कर ऐसी बात बोल रहा है तो समझ जाना चाहिए कि वह साइबर ठग है। तुरंत नंबर को ब्लॉक कर साइबर सेल थाने या 1930 पर कॉल कर जानकारी देनी चाहिए।