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अस्पताल में बच्चे की लापरवाही से मौत,  डॉक्टर बोलते रहे नींद में है.. इंजेक्शन दिया है

Mon, 24 Oct 2016 01:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बच्चे की मौत - फोटो : Demo Pic
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सेक्टर-44 स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में नवजात बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ इलाज में लापरवाही बरतने की शिकायत पुलिस में दी है। पुलिस ने डॉक्टरों की टीम से बच्चे का पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिया है और डीडीआर दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
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अंबाला निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि सात अक्तूबर को उन्होंने 22 दिन के बेटे को अस्पताल में भर्ती करवाया था। उसका शूगर लेवल कम था। डॉक्टरों ने कहा कि पांच-छह दिन के इलाज के बाद बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। 

परिजनों के मुताबिक दो दिन बाद ही डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की हालत बिगड़ गई है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। इसके बाद बच्चे को वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा। दो दिन वेंटिलेटर पर रखने के बाद बच्चे को आईसीयू में रखा गया।
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राजेंद्र ने बताया कि 16 अक्तूबर को उनको अस्पताल से फोन आया कि जल्दी अस्पताल आ जाओ। अस्पताल पहुंचने पर उनको बताया गया कि बच्चे की फीड सांस की नली से होते हुए फेफड़ों में पहुंच गई थी। 

इसकी वजह से बच्चे की तबीयत बिगड़ गई और बच्चे को हाई फ्रीक्वेंसी पर वेंटिलेटर पर रखा गया है। परिजनों का आरोप है कि तबसे बच्चा बेसुध ही पड़ा रहा। जब डॉक्टरों को पूछते थे तो वे कहते थे कि बच्चे को नींद का इंजेक्शन दिया हुआ है और सो रहा है।
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दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा तो बताया बच्चे की मौत हो गई

पु‌लिस - फोटो : file photo
पिता ने बताया कि वीरवार को जब उन्होंने बच्चे को देखा तो उसकी शरीर फूला हुआ था। बच्चे के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। परिवारवालों को परेशान देख कर अस्पताल के ही किसी व्यक्ति ने बताया कि आप लाखों रुपये फीस भर चुके हैं। 

पहले अपने बच्चे का स्टेटस तो जान लो। इस पर परिवार को शक हुआ। जब उन्होंने कहा कि वे बच्चे को कहीं बाहर दिखाना चाहते हैं तो अस्पताल प्रशासन ने कहीं जाने नहीं दिया। इसके बाद शनिवार को जब उन्होंने अस्पताल पर बाहर से इलाज करवाने का दबाव बनाया तो रात को 9 बजे अस्पताल ने कह दिया कि बच्चे की मौत हो चुकी है। 

राजेंद्र ने आरोप लगाए कि बच्चे की मौत काफी पहले हो चुकी थी, लेकिन अस्पताल ने फीस बनाने के चक्कर में इतने दिन बच्चे को अस्पताल में रखा। परिवार का कहना है कि 15 दिन में अस्पताल में बच्चे के इलाज पर 4 लाख रुपये से ज्यादा का खर्चा किया।

बच्चे के इलाज का रिकार्ड लिया कब्जे में
परिवार शनिवार रात ही सेक्टर 34 पुलिस स्टेशन में जाकर अस्पताल के खिलाफ शिकायत दे दी। पुलिस ने बच्चे का शव जीएमएसएच-16 मोर्चरी में रखवा दिया था। रविवार को पुलिस ने तीन डाक्टरों का बोर्ड बनवाकर बच्चे का पोस्टमार्टम करवाया और शव परिजनों को सौंप दिया। 

मामले की जांच कर रहे सब इंस्पेक्टर नरिंदर सिंह ने बताया कि परिजनों की शिकायत मिलने के बाद अस्पताल से बच्चे के इलाज से जुड़ा रिकार्ड कब्जे में ले लिया है। जांच पूरी होने के बाद मामले में एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी। 
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