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चंडीगढ़ रेप: 'आरोपी' अफसरों के खिलाफ जांच रोकी

Tue, 29 Apr 2014 10:09 AM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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खुडा लाहौरां में कांस्टेबलों द्वारा नाबालिग छात्रा से दुराचार मामले में पीड़िता पर पुलिस अफसरों द्वारा दबाव बनाने की जांच रोक दी गई है।
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पिछले साल दिसंबर में मामला सामने आने पर पीड़िता के भाई ने आईजी की चिट्ठी लिखकर कुछ पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मामले में समझौता कराने के लिए दबाव बनाया था और पीड़िता से बुरा व्यवहार किया।

आईजी ने शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर रही एसआईटी भंग कर दी थी और आरोपों की जांच एसएसपी ट्रैफिक को सौंपते हुए जल्द रिपोर्ट देने को कहा था।

क्यों रोकी जांच

एसएसपी ट्रैफिक मनीष चौधरी को जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था मगर मामले की जांच कई महीने लटकी रही। इस बीच विजीलेंस ने पुलिस की कार्यप्रणाली की जांच की अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

इसके बाद एसएसपी ट्रैफिक से कह दिया गया अब उनकी जांच रिपोर्ट की विभाग को जरूरत नहीं है। हालांकि एसएसपी ट्रैफिक को उन आरोपों की जांच करनी थी जो पीड़िता के भाई ने लगाए थे। इस तरह पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

इन आरोपों की जांच रह गई अधूरी

- पुलिस थाने में अधिकारियों ने पीड़िता पर आरोपी पुलिस कर्मचारियों के साथ समझौता करने का दबाव बनाया।
- पीड़िता के बयान दर्ज करते समय आरोपी अक्षय और सुनील को उसके सामने बैठाया गया।
- दोनों आरोपियों को कुर्सी पर बैठाया गया, जबकि पीड़िता और उसके भाई को नीचे कौने में बैठने को कहा।
- तत्कालीन जांच अधिकारी ने कहा कि यह बलात्कार नहीं प्रेम प्रसंग का मामला है।
- तत्कालीन जांच अधिकारी का व्यवहार पीड़िता के प्रति सही नहीं था। इसकी जांच करवाई जाए।
- मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी में उन्हीं अधिकारियों को शामिल किया गया, जिन पर दबाव बनाने का आरोप है।
(पीड़िता के भाई ने 22 दिसंबर को आईजी आरपी उपाध्याय को पत्र लिखकर पुलिस की जांच टीम पर ये आरोप लगाए थे।

यह बचाने की साजिश : वकील

पीड़िता के वकील ब्रजेश्वर जसवाल का कहना है कि यह आरोपी कर्मचारियों और थाने में हुए दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों और अफसरों को बचाने की साजिश है। जब एक बार जांच एसएसपी ट्रैफिक को सौंप दी गई थी तो इसकी रिपोर्ट भी आनी चाहिए थी। विजिलेंस रिपोर्ट की प्रति भी पीड़िता को मिलनी चाहिए। उवह फास्ट ट्रेक कोर्ट से भी जल्द मामले पर फैसला लेने की अपील करने जा रहे हैं। उधर पीड़िता के भाई का भी कहना है कि जब एक बार जांच शुरू हो गई थी तो उसकी रिपोर्ट भी आनी चाहिए थी।

कोट
विभाग की ओर से कह दिया गया है कि अब अलग से किसी जांच रिपोर्ट की जरूरत नहीं है। विजिलेंस जांच को मंजूर कर लिया गया है।
-मनीष चौधरी, एसएसपी, ट्रैफिक
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नहीं हो सके पीड़िता के बयान

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की अदालत में दुराचारी कांस्टेबल गैंग मामले की सुनवाई सोमवार को एक दिन के लिए टल गई। इस मामले में पीड़िता के बयान होने थे। अब सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।

यह है मामला
खुड्डा लाहौरा निवासी दसवीं क्लास की छात्रा ने 19 दिसंबर 2013 को चंडीगढ़ पुलिस के पीसीआर और क्राइम ब्रांच में तैनात पांच कांस्टेबलों पर दुराचार और छेड़छाड़ की शिकायत दी थी। इस पर पुलिस ने पांच कांस्टेबल अक्षय, सुनील, अनिल, जगतार और हिम्मत के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। विभाग ने पांचों कांस्टेबलों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। पुलिस ने 21 फरवरी को पांचों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की थी। इसके बाद अदालत ने पांचों पर आरोप तय किए थे।
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