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चंडीगढ़ रेपकांड: पांचों वर्दीधारी 'बलात्कारी' बरी

Wed, 12 Nov 2014 09:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ के बहुचर्चित खुड्डा लाहौरा रेपकांड के आरोपी पांचों पुलिसवालों को अदालत ने बरी कर दिया है। मामला, 19 दिसंबर 2013 को सामने आया था। रेपकांड में पुलिस के पांच कांस्टेबलों का नाम आने के कारण पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी। मामले में कांस्टेबल अक्षय, अनिल, सुनील, जगतार और हिम्मत को आरोपी बनाया गया था।
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आरोप था कि खुड्डा लाहौरा निवासी दसवीं क्लास की छात्रा ने 19 दिसंबर 2013 को चंडीगढ़ पुलिस के पीसीआर और क्राइम ब्रांच में तैनात पांच कांस्टेबलों पर दुराचार और छेड़छाड़ की शिकायत दी थी। इस पर पुलिस ने अक्षय, सुनील, अनिल, जगतार और हिम्मत के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस विभाग ने पांचों कांस्टेबलों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।

जांच के लिए पुलिस विभाग ने डीएसपी कमला मीणा के नेतृत्व में एसआईटी बनाई थी। एसआईटी ने 21 फरवरी को पांचों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की थी। अदालत ने अक्षय और सुनील पर पद का दुरुपयोग करने, अपहरण, दुराचार (पार्ट-2), धमकाने, साजिश रचने, पोस्को एक्ट की धारा-6 के तहत आरोप तय किए। वहीं, जगतार, हिम्मत और अनिल पर छेड़छाड़, गलत नियम से रोकने, आपराधिक साजिश रचने और पोस्को एक्ट की धारा-12 के तहत आरोप तय किए थे।
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आरोपियों से कोई लेना देना नहीं

खुड्डा लाहौरा में पुलिस कर्मचारियों द्वारा किए गए गैंगरेप की पीड़िता अपने दिए हुए ब्यानों से मुकर गई है। पीड़िता को गवाही देने के लिए बुलाया गया था।

जिला अदालत में पीड़िता ने कहा कि वह सिर्फ आरोपी अक्षय को ही जानती है बाकी आरोपियों से उनका कोई लेना देना नहीं है। इन आरोपियों को उसने पहले कभी नहीं देखा है।

पीड़िता ने अदालत में कहा कि आरोपी कांस्टेबल अक्षय को वह जानती थी। पीड़िता ने कहा कि वह अक्षय से शादी करना चाहती थी। अक्षय के साथ उसकी दोस्ती थी।

पीड़िता ने यह भी कहा कि जो 20 दिसंबर को सीआरपीसी की धारा-164 के तहत ब्यान दर्ज हुए है वह उनसे दबाव में आकर दिए हैं। पीड़िता के अनुसार उस पर लोगों का दबाव था और उसे सीखा कर भेजा गया था।

बलात्कार का लगाया था आरोप

इससे पहले जो जिला अदालत में पीड़िता ने ब्यान दर्ज करवाई थी उसमे सभी पांचों पुलिस कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए थे। अब सुनवाई की अगली तारीख 25 मार्च तय की गई है।

मालूम हो कि जब यह मामला सामने आया था तो भाजपा पार्टी ने शहर में जमकर प्रदर्शन किया गया था। आरोपी अक्षय और सुनील से प्रदर्शनकारियों ने मारपीट भी की थी।

मालूम हो कि सभी 5 आरोपी पुलिस कर्मचारी इस समय न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।

वकील को भाई का आया मैसेज

वीरवार सुबह 8.30 बजे पीड़िता के वकील ब्रजेश्वर जसवाल के मोबाइल पर भाई का मैसेज आया था। वकील के अनुसार पीड़िता के भाई ने मैसेज में कहा था कि उसकी बहन की तबीयत ठीक नहीं है और गवाही के लिए अगली तारीख अदालत में ले ली जाए लेकिन कुछ देर बाद उन्हें पता चला कि पीड़िता जिला अदालत में गवाही देने के लिए गई।

वकील ब्रजेश्वर जसवाल का कहना है कि साजिश के तहत पीड़ित के ब्यान बदलवाएं गए हैं। उन्होंने कहा कि पीड़िता और उसके परिवार पर समझौते का दबाव बनाया गया है। लेकिन अदालत से अगली सुनवाई में पहले से दिए गए धारा-164 के तहत दिए गए ब्यानों को आधार मानकर फैसला सुनाने की अपील की जाएगी।

जसवाल का कहना है कि 14 मार्च को पीड़िता घर से गायब हो गई थी जो कि 16 मार्च को मिली थी। उनका कहना है कि इस दौरान भी पीड़िता ने दबाव में आकर घर छोड़ा था।

खुद पीड़िता ने लिखी थी शिकायत

19 दिसंबर को सेक्टर-11 पुलिस ने धारा-341,354,376,376डी और पोस्को एक्ट-2012 के तहत 17 साल की पीड़ित छात्रा के ब्यानों पर मामला दर्ज किया है।

पीड़ित लड़की ने पुलिस में दी शिकायत में कहा है कि आरोपी 5 कर्मचारियों ने उसे और उसके मा- बाप को भी जान से मारने की धमकी दी है। जिनमे से दो उसके साथ दुराचार करते है और बाकी कर्मचारी उसे छह माह तक रिलेंशन बनाने का दबाव डालते है ऐसा न करने पर तंग करने की धमकी देते है।

शिकायत के अनुसार आरोपी तीन कर्मचारी उसे संबंध बनाने के लिए ब्लैकमेल भी करते थे वह किसी ने उनसे बचकर भाग जाती थी। शिकायत में कहा है कि आरोपी कर्मचारी उसे जबदस्ती गाड़ी में बिठाकर कर सुनसान जगह पर ले गए। वहां पर जब उसने भागने का प्रयास किया तो सिर पर रिवाल्वर लगा दी और तीन पुलिस वालों ने छेड़छाड़ की जबकि अक्षय और सुनील ने दुराचार किया।

शिकायत के अनुसार बीच रास्ते में पीसीआर सहित कर्मचारी उसका पीछा करते थे। पीड़ित लड़की के अनुसार जब वह स्कूल जाती थी तब भी पीसीआर कर्मचारी पीछा करते थे।        

6 दिन पहले हो गई थी अचानक गायब

पुलिस कांस्टेबलों द्वारा सामूहिक दुराचार और छेड़छाड़ के मामले की पीड़ित नाबालिग छात्रा 5 दिन पहले रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गई थी। शुक्रवार को वह ट्यूशन पढ़ने गई थी और वापस नहीं लौटी।

पीड़िता के परिवार पर मामले में समझौते के लिए और बयानों से पलटने के लिए दबाव पड़ रहा है। पीड़िता के वकील ब्रजेश्वर जसवाल ने बताया कि पीड़िता के परिवार को बयान से पलटने के लिए लाखों रुपये का प्रलोभन दिया जा रहा है। रेप पीड़ित नाबालिग छात्रा के गायब होने का मामला सेक्टर-11 थाने में दर्ज किया गया था।

ये था मामला

19 दिसंबर को सेक्टर-11 पुलिस ने पांच पुलिस कांस्टेबलों पर 17 वर्षीय छात्रा से रेप और छेड़छाड़ का मामला धारा-341, 354, 376, 376-डी और पोस्को एक्ट-2012 के तहत दर्ज किया था।

पीड़ित ने कहा था कि उससे पुलिस जिप्सी और गाड़ियों में पीसीआर में तैनात कांस्टेबल अक्षय और सुनील ने दुराचार किया। उनके तीन अन्य साथियों हिम्मत, जगतार और अनिल ने उससे छेड़छाड़ की।

अभी तक अटकी पड़ी है दुर्व्यवहार की रिपोर्ट

खुडा लाहौरा में कांस्टेबलों द्वारा दुराचार मामले की पीड़िता पुलिस के खिलाफ न्याय की लड़ाई अकेले ही लड़ रही है। आरोपी कांस्टेबलों को पुलिस के अधिकारियों की ओर से पूरा सहयोग मिल रहा है।

शिकायत दर्ज कराते समय 19 दिसंबर को पीड़िता से जो दुर्व्यवहार हुआ उस मामले की जांच रिपोर्ट अभी तक अटकी है। इतना ही नहीं पीड़िता को बयान से मुकरने वाली लेडी कांस्टेबल का नाम सामने आने के बाद भी पुलिस की ओर से उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

इन आरोपों की होनी थी जांच

पीड़िता के भाई ने 22 दिसंबर को आईजी आरपी उपाध्याय को पत्र लिखकर पुलिस की जांच टीम पर ये आरोप लगाए थे।
- पुलिस थाने में अधिकारियों ने उनकी बहन पर आरोपी पुलिस कर्मचारियों के साथ समझौता करने का दबाव बनाया गया
- पीड़िता के बयान दर्ज करते समय आरोपी अक्षय और सुनील को सामने बैठाया गया।
- दोनों आरोपियों को कुर्सी पर बैठाया गया, जबकि पीड़िता और उसके भाई को नीचे कौने में बैठने को कहा।
- तत्कालीन जांच अधिकारी ने कहा कि यह बलात्कार नहीं प्रेम प्रसंग का मामला है।
- तत्कालीन जांच अधिकारी का व्यवहार पीड़िता के प्रति सही नहीं था। इसकी जांच करवाई जाए।
- उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है, मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
- मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी में उन्हीं अधिकारियों को शामिल किया गया, जिन पर दबाव बनाने का आरोप है।

कांस्टेबल कविता को खुली छूट

पीड़िता के वकील ब्रजेश्वर जसवाल का कहना है कि आरोपी कांस्टेबल अनिल की पत्नी (कांस्टेबल कविता) एसआईटी की जांच के समय से ही पीड़िता के संपर्क में थी। आरोपी महिला कांस्टेबल ने ही पीड़िता के साथ आरोपियों के परिजनों का समझौता करवाने का प्रयास किया। उनका कहना है कि महिला कांस्टेबल की पीड़िता के साथ कई बार मोबाइल पर बात हुई है। यह सब कुछ मोबाइल डिटेल से साबित हो रहा है।

बाबा रामदेव को मोहरा बनाया

पीड़ित पक्ष के अनुसार उनकी पहचान उजागर करने के लिए बाबा रामदेव को भारी भीड़ के साथ पुलिस अधिकारी उनके घर लेकर पहुंचे। इस वजह से पूरा परिवार अपमानित हुआ और मजबूरन उन्हें अपना पुश्तैनी घर बेचना पड़ा। वे जहां भी घर लेते हैं, पुलिस के दबाव में मकान मालिक जल्द ही उनसे घर खाली करवा लेते हैं। पीड़िता की पहचान उजागर होने पर युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष हरमेल केसरी की ओर से पुलिस विभाग में बाबा रामदेव की शिकायत की गई लेकिन यह जांच भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।

राजनीतिक दल भी कन्नी काट गए

मामला उजागर हुआ तो भाजपा और कांग्रेस ने सड़कों पर इस मामले को लेकर काफी राजनीति की। मगर धीरे-धीरे पूरा मामला ही मैनेज हो गया और न्याय की लड़ाई में पीड़िता अकेली रह गई। पीड़िता के भाई का कहना है कि शुरू से उनकी बहन पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि पूरा परिवार काफी परेशानी से जूझ रहा है। इसलिए सुरक्षा की भी मांग की गई है। बाबा रामदेव ने घर आकर मदद देने का वायदा किया और मीडिया में वाहवाही लूटी मगर उनका वादा भी झूठा साबित हुआ।

ये कहते हैं पुलिस अधिकारी

पीड़िता के भाई की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच पूरी होने वाली है। इसी माह रिपोर्ट आईजी को सौंप दी जाएगी।
-मनीष चौधरी, एसएसपी ट्रैफिक

एसएसपी ट्रैफिक को सौंपी थी जांच

खुडा लाहौरां में कांस्टेबलों द्वारा नाबालिग छात्रा से दुराचार मामले में पीड़िता पर पुलिस अफसरों द्वारा दबाव बनाने की जांच रोक दी गई है।

पिछले साल दिसंबर में मामला सामने आने पर पीड़िता के भाई ने आईजी की चिट्ठी लिखकर कुछ पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मामले में समझौता कराने के लिए दबाव बनाया था और पीड़िता से बुरा व्यवहार किया।

आईजी ने शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर रही एसआईटी भंग कर दी थी और आरोपों की जांच एसएसपी ट्रैफिक को सौंपते हुए जल्द रिपोर्ट देने को कहा था।

क्यों रोकी जांच

एसएसपी ट्रैफिक मनीष चौधरी को जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था मगर मामले की जांच कई महीने लटकी रही। इस बीच विजीलेंस ने पुलिस की कार्यप्रणाली की जांच की अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

इसके बाद एसएसपी ट्रैफिक से कह दिया गया अब उनकी जांच रिपोर्ट की विभाग को जरूरत नहीं है। हालांकि एसएसपी ट्रैफिक को उन आरोपों की जांच करनी थी जो पीड़िता के भाई ने लगाए थे। इस तरह पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

इन आरोपों की जांच रह गई अधूरी

- पुलिस थाने में अधिकारियों ने पीड़िता पर आरोपी पुलिस कर्मचारियों के साथ समझौता करने का दबाव बनाया।
- पीड़िता के बयान दर्ज करते समय आरोपी अक्षय और सुनील को उसके सामने बैठाया गया।
- दोनों आरोपियों को कुर्सी पर बैठाया गया, जबकि पीड़िता और उसके भाई को नीचे कौने में बैठने को कहा।
- तत्कालीन जांच अधिकारी ने कहा कि यह बलात्कार नहीं प्रेम प्रसंग का मामला है।
- तत्कालीन जांच अधिकारी का व्यवहार पीड़िता के प्रति सही नहीं था। इसकी जांच करवाई जाए।
- मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी में उन्हीं अधिकारियों को शामिल किया गया, जिन पर दबाव बनाने का आरोप है।
(पीड़िता के भाई ने 22 दिसंबर को आईजी आरपी उपाध्याय को पत्र लिखकर पुलिस की जांच टीम पर ये आरोप लगाए थे।

यह बचाने की साजिश : वकील

पीड़िता के वकील ब्रजेश्वर जसवाल का कहना है कि यह आरोपी कर्मचारियों और थाने में हुए दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों और अफसरों को बचाने की साजिश है। जब एक बार जांच एसएसपी ट्रैफिक को सौंप दी गई थी तो इसकी रिपोर्ट भी आनी चाहिए थी। विजिलेंस रिपोर्ट की प्रति भी पीड़िता को मिलनी चाहिए। उवह फास्ट ट्रेक कोर्ट से भी जल्द मामले पर फैसला लेने की अपील करने जा रहे हैं। उधर पीड़िता के भाई का भी कहना है कि जब एक बार जांच शुरू हो गई थी तो उसकी रिपोर्ट भी आनी चाहिए थी।

कोट
विभाग की ओर से कह दिया गया है कि अब अलग से किसी जांच रिपोर्ट की जरूरत नहीं है। विजिलेंस जांच को मंजूर कर लिया गया है।
-मनीष चौधरी, एसएसपी, ट्रैफिक
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नहीं हो सके पीड़िता के बयान

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की अदालत में दुराचारी कांस्टेबल गैंग मामले की सुनवाई सोमवार को एक दिन के लिए टल गई। इस मामले में पीड़िता के बयान होने थे। अब सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।

यह है मामला
खुड्डा लाहौरा निवासी दसवीं क्लास की छात्रा ने 19 दिसंबर 2013 को चंडीगढ़ पुलिस के पीसीआर और क्राइम ब्रांच में तैनात पांच कांस्टेबलों पर दुराचार और छेड़छाड़ की शिकायत दी थी। इस पर पुलिस ने पांच कांस्टेबल अक्षय, सुनील, अनिल, जगतार और हिम्मत के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। विभाग ने पांचों कांस्टेबलों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। पुलिस ने 21 फरवरी को पांचों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की थी। इसके बाद अदालत ने पांचों पर आरोप तय किए थे।
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