विदेश जाना हो तो इमिग्रेशन कंपनियों की पहले जांच कर लें। किसी के झांसे में न आएं। चंडीगढ़ में कई फर्जी कंपनियां पैसे लेने के बाद दफ्तर में ताले लगाकर फरार हो चुकी हैं जिन्हें पुलिस भी पकड़ने में नाकाम रही है। इस साल अभी तक पुलिस इमिग्रेशन फ्रॉड के लगभग 40 केस दर्ज कर चुकी है। इनमें कुछ ही आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।
मार्च माह में साइबर सेल थाना पुलिस ने विदेश भेजने का झांसा देकर ठगी करने वाले मोहाली थ्रीबीटू निवासी वरिंदर सिंह और परमिंदर सिंह को गिरफ्तार कर 26 मोबाइल फोन, 22 पासपोर्ट और 3 लैपटॉप बरामद किए थे। पासपोर्ट राजस्थान, असम, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंधा प्रदेश व अन्य जगह के थे। आंध्र प्रदेश निवासी टाटा नागा वामसी की शिकायत पर 12 मार्च को सेक्टर-17 थाने में केस दर्ज किया था। पीड़ित ने बताया था कि उसने फेसबुक पर गोल्डन कॅरियर कंसल्टेंसी की ओर से विदेश भेजने के लिए कनाडा का वीजा लगवाने को लेकर डाला गया विज्ञापन देखा था। विज्ञापन देखने के बाद नंबर पर व्हाट्सएप कॉल कर संपर्क किया। आरोपियों ने सेक्टर-17 बस स्टैंड के पीछे पीड़ित को बुलाया और डाक्यूमेंट व डेढ़ लाख रुपये लेकर चले गए। कुछ दिनों बाद कहा कि कोविड की वजह से वीजा कैंसिल हो गया है। बाद में फोन उठाना ही बंद कर दिया।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट वरिंदर सिंह ने 5 जुलाई को इमिग्रेशन फ्रॉड में आरोपी मोहाली के सेक्टर-70 के रहने वाले देवेंदर गिल उर्फ देवेंदर थापा और उसकी पत्नी क्रिस्पी खैरा के खिलाफ सात राज्यों के 700 लोगों से करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। देवेंदर गिल रोपड़ जेल में है जबकि उसकी पत्नी भगोड़ा घोषित होने के बाद से फरार है। दंपती के खिलाफ चंडीगढ़ में पांच मामले दर्ज हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने साल 2021 में देवेंदर गिल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पंजाब पुलिस देवेंदर गिल को प्रोडक्शन वारंट लेकर गई।