खुड्डा लाहौरा की दसवीं कक्षा की छात्रा के साथ गैंगरेप मामले में पांच आरोपियों को जिला अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। गैंगरेप के इस मामले में पांच कांस्टेबल अभियुक्त बनाए गए थे।
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इनमें अक्षय, सुनील और अनिल, हिम्मत और जगतार शामिल रहे। चंडीगढ़ पुलिस ने अक्षय और सुनील पर दुराचार की धारा लगाई, तीन अन्य पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया। पांचों आरोपियों पर पास्को एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे।
पीड़िता के बार बार बयान बदलने और सीएफएसएल रिपोर्ट में डीएनए के मिलान न होने और पीड़िता की उम्र साबित न होने के कारण अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड़ गया। इस हाईप्रोफाइल केस में अभियोजन पक्ष के आरोप साबित नहीं हो सके।
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दो माह बाद पेश की चार्जशीट
गैंगरेप के मामले में पुलिस ने दो माह बाद जिला अदालत में चालान पेश किया था। इसके अनुसार दुराचार और छेड़छाड़ के मामले में पांच पुलिसकर्मी आरोपी बताए गए थे। पुलिस द्वारा पेश किए चालान में कांस्टेबल अक्षय और सुनील पर दुराचार की धारा लगाई गई थी और अन्य तीन पर छेड़छाड़ की धारा लगाई गई। सभी पांचों आरोपियों पर पास्को एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे।
यहां से पलटा मामला सभी कांस्टेबलों पर आरोप साबित करने के लिए भेजी गई लैब रिपोर्ट फेल हो गई। इस मामले में सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में भेजे गए पीड़ित के स्वैब आरोपी के डीएनए से मैच नहीं हुए। इस मामले में आरोपी के कपड़ों पर किसी प्रकार के सीमेंस नहीं मिले थे।
पीड़ित भी मुकर गई गैंगरेप के इस मामले में पीड़िता के बयान से मुकरने की वजह से मामला ढीला पड़ गया था।
पीड़िता बयानों से पलटी
पीड़िता ने जिला अदालत में कहा कि वह सिर्फ आरोपी अक्षय को ही जानती है बाकी आरोपियों से उनका कोई लेना देना नहीं है। इन्हें उसने पहले कभी नहीं देखा है। वह अक्षय से शादी करना चाहती थी। उसके साथ उसकी दोस्ती थी। 20 दिसंबर को सीआरपीसी की धारा-164 के तहत जो बयान दर्ज हुए, वे उसने दबाव में आकर दिए। उस पर लोगों का दबाव था और उसे सीखा कर भेजा गया था।
दोबारा बयान दर्ज कराने को कहा बोली- कांस्टेबल की पत्नी ने बनाया दबाव पीड़िता ने अदालत में पेश होकर मामले में दोबारा बयान दर्ज करने की अर्जी दायर की। इसमें उसने कहा था कि उस पर कांस्टेबल अनिल की पत्नी कविता समेत अन्य परिजनों ने बयान पलटने का दबाव बनाया था।
रिकार्डिंग की सीडी दी अदालत को चार सीडी दी गईं। इनमें एक आरोपी की लेडी कांस्टेबल पत्नी और संबंधियों की ओर पीड़िता पर दबाव बनाए जाने की रिकार्डिंग दर्ज होने का दावा किया गया है। पीड़िता ने साथ ही हस्तलिखित अर्जी देकर कहा कि उसे इस मामले में इंसाफ दिया जाए।
दोबारा बयान दर्ज कराने नहीं पहुंची
पीड़िता अदालत में दोबारा बयान दर्ज करवाने नहीं पहुंच पाई। अदालत ने तीन घंटे तक इंतजार करने के बाद पीड़िता द्वारा दायर की गई अर्जी को खारिज कर दिया। वहीं पीड़िता सुबह से मामले की सुनवाई समाप्त होने तक अदालत परिसर में ही थी।
सुनवाई खत्म होने के बाद पीड़िता कोर्ट रूम के बाहर पहुंची। रेप की शिकार नाबालिग लड़की ने बताया कि दोबारा से बयान दर्ज करवाने की अदालत की तारीख को वह भूल गई थी। जब याद आया तो अदालत में पहुंची, लेकिन उस समय तक अर्जी खारिज हो चुकी थी।
लैब रिपोर्ट हो गई फेल आरोपियों पर आरोप को साबित करने के लिए भेजी गई लैब रिपोर्ट फेल हो गई। इस मामले में सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री में भेजे गए पीड़िता के स्वैब आरोपी के डीएनए से मैच नहीं हुए। इस मामले में आरोपी के कपड़ों पर किसी प्रकार के सीमेंस नहीं मिले थे।
जगतार सिंह : मई 2010 में चंडीगढ़ पुलिस ज्वाइन की। नवंबर 26, 2010 तक सीआईडी में रहे। उसके बाद सेक्टर-25 में पीसीआर पर ड्यूटी लगी। अक्षय कुमार : 2011 में पुलिस की नौकरी ज्वाइन की, पीसीआर में दिसंबर 2011 तक रहे और उसके बाद सेक्टर-31 में सीआईडी और सेक्टर-31 पुलिस स्टेशन में रहे। इसके बाद 26 नवंबर 2013 में पीसीआर में पोस्टेड। हिम्मत सिंह : मई 2011 में पुलिस ज्वाइन की, उसके बाद पीसीआर में पोस्ट किए गए। सुनील कुमार : मई 2011 में पुलिस ज्वाइन की और उसके बाद एक साल सीआईडी में रहे। उसके बाद क्राइम ब्रांच में अप्वाइंट किए गए।