चंडीगढ़ के सेक्टर-34 स्थित पासपोर्ट ऑफिस की पार्किंग में 1999 में हुए बम ब्लास्ट केस की शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई हुई। इस दौरान पुलिस के फोटोग्राफर इंस्पेक्टर करनैल सिंह और ब्लास्ट में क्षतिग्रस्त होने वाले दो वाहनों के मालिकों के बयान दर्ज किए गए। वहीं इस मौके पर ब्लास्ट के आरोपी और बब्बर खालसा के सदस्य रतनदीप सिंह को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में नाभा जेल से कोर्ट में पेश किया गया।
इंस्पेक्टर (फोटोग्राफर) करनैल सिंह ने कोर्ट में दर्ज बयान में कहा कि बम ब्लास्ट के बाद उन्हें आईओ का फोन आया था। इसके 15 मिनट बाद ही वह मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने ही घटना के बाद की तस्वीरें खींची थी। वहीं, जहां बम ब्लास्ट हुआ था, वहां टू व्हीलर खड़े करने वाले दो लोगों जगजीत सिंह और शशि संधू के भी बयान हुए। वह इसी सेक्टर में नौकरी करते थे। दोनों ने कोर्ट में कहा कि जैसे ही उन्हें धमाके की आवाज आई तो वह बाहर आए।
उन्होंने देखा कि पार्किंग में अफरातफरी मची हुई थी और कुछ टूव्हीलर जल रहे थे। इनमें उनके भी वाहन थे। केस की अगली सुनवाई पर अन्य गवाहियां दर्ज की जाएंगी। बता दें कि लंबे समय से फरार चल रहे रतनदीप को सितंबर 2014 में गोरखपुर (यूपी) से नेपाल बार्डर के पास से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद इसी वर्ष कोर्ट में उसके खिलाफ विस्फोटक एक्ट 3, 4 व 5 और हत्या के प्रयास की धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे। रतनदीप पर बम ब्लास्ट में आरडीएक्स मुहैया कराने का आरोप है।