पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने समझौता ब्लास्ट मामले के आरोपी स्वामी असीमानंद की जमानत याचिका को दूसरे बेंच को रेफर कर दिया है।
असीमानंद ने हाईकोर्ट में एनआईए कोर्ट के आदेशों को चुनौती देते हुए जमानत देने का आग्रह किया है। एनआईए कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एसएस सैरों और जस्टिस नविता सिंह पर आधारित डीबी ने मामले को रोस्टर के अनुसार क्रिमिनल बेंच के पास रेफर करने के निर्देश जारी कर दिए।
मामले में असीमानंद के वकील अनिल मेहता ने कहा कि स्वामी असीमानंद की जमानत याचिका में कुछ मुख्य पहलुओं को आधार बनाया गया है।
इन पहलुओं में पहली बात तो यह है कि मामला पिछले काफी समय से चल रहा है और अभी तक देश की सभी बड़ी जांच एजेंसियां इसकी जांच में जुटी हुई हैं, लेकिन किसी भी एजेंसी को स्वामी असीमानंद के खिलाफ सबूत नहीं मिला है। वहीं दूसरी ओर इस मामले में ट्रायल अभी शुरू हुआ है।
अब तक इस मामले में केवल छह गवाहों की गवाही हो पाई है और लगभग 300 की गवाही अभी बाकी है। इस पूरे क्रम में लगभग तीन साल का वक्त और लगेगा, क्योंकि कुछ गवाह अभी पाकिस्तान में हैं और वहां जाकर इस मामले में गवाहियों का दौर चलेगा।
याचिका में स्वामी असीमानंद की उम्र का भी हवाला दिया गया है और कहा गया है कि उनकी उम्र लगभग 70 वर्ष है, ऐसे में जेल में उनकी तबियत बिगड़ भी सकती है।