कोर्ट में विजिलेंस यह साबित नहीं कर सकी कि जिस क्लर्क को रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा गया, उसने नोट निगल लिया था। इसी को आधार मानते हुए कोर्ट ने आरोपी क्लर्क को बरी कर दिया।
विजिलेंस टीम ने तीन मई 2012 को तत्कालीन कालका नगरपालिका कार्यालय में तैनात क्लर्क प्रवीण कुमार को एक हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा था। यह शिकायत कालका निवासी विकास ने दी थी।
आरोप थे कि प्रवीण कुमार उसके पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की एवज में एक हजार रुपये की मांग कर रहा है। कोर्ट में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक शिकायत के आधार पर विजिलेंस ने ट्रैप लगाया और विकास पैसे लेकर प्रवीण के घर जाकर उसे हजार रुपये का नोट दिया।
जब विजिलेंस टीम प्रवीण को पकड़ने गई तो वह घर से भाग गया, लेकिन कुछ ही दूरी पर उसे पकड़ लिया गया। जब उससे नोट के बारे में पूछा गया तो पहले उसने नोट गिर जाने की बात कही, लेकिन बाद में पूछताछ के दौरान कहा कि नोट निगल लिया।
आरोपी पक्ष के वकील अमित डुडेजा ने बताया कि कोर्ट में ट्रायल के दौरान सेक्टर-6 स्थित जनरल अस्पताल के डॉक्टर संजीव त्रेहन की भी गवाही हुई।
त्रेहन ने कोर्ट में कहा कि चूंकि आरोपी का मेडिकल 24 घंटे के अंदर नहीं कराया गया। इसलिए नोट निगलने के बारे में कोई पक्ष नहीं रखा जा सकता है। नोट का पता नहीं चला और न ही कोई रिकवरी हुई।
इतना ही नहीं शिकायतकर्ता भी कोर्ट में पेश नहीं हुआ, क्योंकि वह अपने किसी अन्य केस में कोर्ट से भगोड़ा घोषित हो चुका है। डुडेजा के मुताबिक, विजिलेंस टीम के बयान में भी झोल था।