रिवाड़ी खेड़ा निवासी विकास दलाल के परिवार का गांव के एक परिवार के साथ विवाद हो गया था। विवाद बढ़ा तो विकास के परिवार को गांव छोड़ना पड़ा और नजफगढ़ चला गया। अपने गांव के उक्त परिवार से बदला लेने के लिए विकास ने अपराध की दुनिया में कदम रखा। वर्ष-2010 में विकास ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर गुड़गांव के तावड़ में ट्रक लूटा। इस मामले में विकास पकड़ा गया। जेल में वह दिल्ली के गैंगस्टर मंजीत महाल के संपर्क में आया।
2016 में हुआ मंजीत महाल गिरोह में शामिल
वर्ष 2011 में जेल से बाहर आने के बाद इसने कृष्ण पहलवान गिरोह के बदमाश वरुण जांगड़ा के साथ प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया। विवाद होने पर विकास ने वरुण का साथ छोड़ दिया तो वरुण ने विकास के पिता ओमप्रकाश की बेइज्जती कर दी थी। इस पर ओमप्रकाश ने खुदकुशी कर ली। इसका बदला लेने के लिए विकास ने साथियों के साथ अक्तूबर-2014 में वरुण की हत्या कर दी।
वर्ष 2016 तक जेल में रहने के बाद में ये पेरोल जंप कर गया और कृष्ण पहलवान की हत्या करने के लिए मंजीत महाल गिरोह में शामिल हो गया था। विकास इस गैंग की ओर से की गई सात हत्याओं व लूट की वारदातों में शामिल रहा है। जून 2017 में गिरफ्तार हुआ।
गांव की पुरानी रंजिश में 17 फरवरी-2017 को विकास ने गांव रिवाड़ी खेड़ा निवासी सुरेंद्र के ऊपर जानलेवा हमला किया, इस हमले में सुरेंद्र बच गया। इसके बाद 19 अप्रैल-2017 में विकास ने अपने साथियों के साथ मिलकर सुरेंद्र के भाई अमित उर्फ मित्ता की हत्या कर दी। अमित की हत्या के बाद ही यह सिलसिला नहीं थमा।
16 अप्रैल 2018 को विकास अपने साथियों सहित फिर से सुरेंद्र को मारने के लिए रिवाड़ी खेड़ा आया। लेकिन रात के अंधेरे में सुरेंद्र के बजाय गोलियां सुनील को लग गई, जिससे उसकी मौत हो गई। दो हत्याओं के मामले में विकास और उसके सात साथी जेल में बंद हैं। सुरेंद्र इन मामलों में गवाह है। गत 20 सितंबर को विकास ने फिर से सुरेंद्र पर जानलेवा हमला कराया था।
परिवार की धड़कन बढ़ी
विकास दलाल के फरार होने से न केवल दिल्ली, बल्कि बहादुरगढ़ पुलिस में भी हलचल बढ़ गई है। विकास ने मंजीत गैंग में रहते हुए दर्जनभर से अधिक वारदात की हैं। उधर, रिवाड़ी खेड़ा निवासी सुरेंद्र का परिवार भी दहशत में है, हालांकि मांडोठी चौकी पुलिस ने उक्त गांव में नजर पैनी कर दी है।