शालीमार एस्टेट के एमडी आरके अग्रवाल और डायरेक्टर कमलेश अग्रवाल को चंडीगढ़ राज्य विवाद निवारण आयोग ने 3-3 साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही आयोग ने 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आयोग ने यह आदेश पटियाला की गीतांजलि और अर्चना की शिकायत पर 21 अक्तूबर, 2014 को दिए गए एक आदेश का पालन न करने पर सुनाया है।
गीतांजलि और अर्चना की शिकायत पर आयोग ने शालीमार एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को दोनों को 23 लाख 30 हजार रुपये 15 प्रतिशत ब्याज समेत देने के आदेश दिए थे। साथ ही एक लाख रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये वाद खर्च भी देने को कहा था। आदेश के अनुसार यह सभी राशि 21 अक्तूबर, 2014 के बाद 45 दिन में अदा करनी थी।
लेकिन, छह महीने बाद तक भी शालीमार एस्टेट की ओर से इस आदेश की पालना नहीं की गई। इसके बाद दोनों शिकायतकर्ताओं ने आयोग में अवमानना याचिका दायर की थी। यह याचिका दूसरी बार दायर की गई थी। पहली याचिका पर शालीमार एस्टेट की ओर से आगे की तारीख (पोस्ट डेटेड) के चेक दिए गए थे, जो बाउंस हो गए थे।
कई मामलों में सुनाई जा चुकी है सजा
शालीमार एस्टेट के एमडी आरके अग्रवाल और उनकी पत्नी कमलेश अग्रवाल के खिलाफ शहर के लोगों से धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। कई मामलों में आयोग उन्हें सजा सुना चुका है तो कई मामलों में उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट निकाले जा चुके हैं। लेकिन, पुलिस अब तक कुछ पता नहीं लगा सकी है।
पुलिस शालीमार मेगा मॉल, उनके सेक्टर-8 स्थित घर में कई बार तलाशी कर चुकी है, लेकिन वह नहीं मिले। पुलिस ने सेक्टर-8 की कोठी के आसपास रहने वाले लोगों और उनके जानकारों से भी पूछताछ की। यहां तक कि एमडी के परिवार के सदस्यों और नौकरों तक की कॉल डिटेल निकाली, लेकिन इसके बावजूद आरके अग्रवाल और कमलेश अग्रवाल को आज तक तलाश नहीं सकी।