दोनों युवको को सेना की नौकरी करने का जुनून सवार था। जब उनका सेलेक्शन नहीं हुआ तो दोनों ने कर दिया ऐसा कांड सभी भौंचक्के रह गए। मामला हरियाणा के भूना का है। दरअसल भिवानी के गांव गोलागढ़ निवासी प्रदीप और सचिन फतेहाबाद में सेना की भर्ती प्रक्रिया में पास तो हो गए लेकिन रिहायशी प्रमाण पत्र को लेकर अड़चन आ गई।
दोनों ने भूना के अफसर कॉलोनी का स्थाई निवासी बताकर फर्जी तरीके से कंप्यूटराइज रिहायशी प्रमाण पत्र तैयार कर जमा करवा दिया। आर्मी दस्तावेज जांच अधिकारी महेंद्र सिंह ने भूना नायब तहसीलदार कार्यालय पहुंचकर दोनों युवकों की रिहायशी प्रमाण पत्रों की वैरीफिकेशन की तो मामले का खुलासा हुआ।
रिहायशी प्रमाण पत्र का क्रमांक नंबर गोरखपुर के किसी अन्य युवक के नाम उप तहसील कार्यालय में दर्ज था। जिससे फर्जीवाड़े का सच सामने आ गया। घटना के दो दिन बाद ही दोनों युवक असली रिहायशी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नायब तहसीलदार कार्यालय भूना पहुंच गए। जिसे देखकर नायब तहसीलदार ओमप्रकाश ने अपने कर्मचारियों की मदद से दोनों को अपने पास बिठा लिया और पुलिस को सूचना दी।
पुलिस को देखते ही प्रदीप भागने लगा तो जांच अधिकारी भाल सिंह ने उसे दबोच लिया। पुलिस पूछताछ में दोनों युवकों ने अपराध कबूल कर लिया। उन्होंने कहा कि सेना में नौकरी पाने के लिए भिवानी में जगह नहीं मिली थी। इसलिए उन्होंने फतेहाबाद में शारीरिक मापदंड प्रक्रिया को पूरा करके सेना में नौकरी पाई थी। रिहायशी प्रमाण पत्र न मिल पाने के कारण उन्हें फर्जीवाडे़ का सहारा लेना पड़ा।
पुलिस जांच अधिकारी भाल सिंह ने बताया कि दोनों युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके बुधवार को अदालत में पेश किया जहां से एक दिन की पुलिस रिमांड पर उन्हें जेल भेज दिया है।